भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

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अष्टक वर्ग विचार : १११

के साथ हो तो वे भी यदि अधिक रेखा वाले हों तो सब काल में शुभ फल देने वाले होते हैं । ( १२ ) जितनी रेखा समुदाय अष्टक वर्ग कुण्डली में लग्न में हों उतने वर्ष बीतने पर वाहन, धन पुत्र विशेष विद्या आदि प्राप्त हो यदि वह सम्पत्ति योग वाला हो । (१३) व्यय भावेश शनि की राशि में हो और लग्न, अष्टम का स्वामी निर्बल हो तो लग्न में जितनी रेखा हों उतने वपं की आयु का अनुमान करना । (१४) चतुर्थेश लग्न में और लग्नेश चतुर्थ में हो उन दोनों राशियों में यदि ३३ रेखा हों तो राजलक्ष्मी युक्त राजा हो । यदि ३०-३० ही रेखा हों तो ४० वर्ष पश्चात्‌ अधिकार प्राप्त हो ।

(१५) १--४-११ इन तीनों घर में ३० से अधिक रेखा हों तो तेजस्वी, बड़ा धनी हो ४० वर्ष के ऊपर राज्य मिले ।

(१६) २५ से ३० तक या अधिक रेखा यदि चतुर्थ ओर नवम राशि में हों तो

२८ वर्ष के पश्चात वाहन युक्त हो या यात्रा करे धन प्राप्त हो । (१७) उच्च ककं का गुरु चतुर्थ में ४० रेखा युक्त हो और लग्न में मेष का सूर्य

हो तो राजा हो लक्ष घोड़ों को अपने पास रखे ।

(१८) लग्न में ४० रेखा हो, धनु में गुरु, मीन में शुक्र, अपने उच्च में मंगल मौर कुम्भ में शनि हों तो सवं लक्षणों से युक्त सार्वभौम राजा हो ।

(१९) मेषादि तीन-तीन राशि में उनके अनुसार पूर्व आदि चारों दिशाओं में

अधिक रेखा वाली राशि की दिशाओं में धन आदि की वृद्धि हो ।

(२०) किसी ग्रह के अष्टक वर्ग में एक भी शुभ रेखा ग्रह न हो तो गोचर में जब यह ग्रह उस राशि में आये तो मृत्युभय हो ।

(२१) राशि जिसमें २५ से २८ तक शुभ रेखा हो वह मध्यम, २५ से कम रेखा

शोक या दुःख उत्पन्न करती है । ३० या अधिक शुभ रेखा सदा लाभदायक है ।

(२२) लग्न से १२ घरों तक सब घरों को देखो जिस-जिस भाव में अधिक रेखा

हो उन भावों सम्बन्धी काम करने में अच्छा फल देगा यदि रेखा कम हों तो कष्ट

होगा । इसमें ६-८-१२ घर को छोड़कर विचार करना ।

(२३) लग्न से शनि तक जितने घर हैं उन दोनों के स्थानों को मिलाकर सब

घर की शुभ रेखा जोड़कर ७ का गुणाकर २७ का भाग दो लब्धि में जो प्राप्त हो उन

वर्षो में जातक को रोग या कष्ट होगा ।

(क) इस प्रकार शनि से लग्न तक सब रेखा योग मे ७ का गुणा कर २७ का

भाग देने से लब्धि से उनके वषं में रोग आदि होगा ।

(ख) इसी प्रकार मंगल और राहु के बीच भी गिन कर उपरोक्त क्रिया द्वारा

विचार करना ।

इससे खराब अनहोनी बातों का समय प्रगट होगा ।

(२४) जिन घरों में शुभ ग्रह हो उनकी शुभ रेखा का योग कर ७ से गुणा कर