भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

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११२ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड

२७ का भाग देना जो लब्धि हो उससे शुभता सूचक वर्ष प्रगट होगा उस समय जातक

को संतान, धन सुख आदि प्राप्त होंगे ।

(२५) जिस राषि में अधिक शुभ रेखा हैं उसमें सब शुभ काम करना उस विशेष

राशि, मास भाव आदि में अधिक शुभ रेखा देख कर शुभ कायं करना गोचर. में सूर्यादि

दुष्ट स्थानों में हों तो शुभ कार्य निषिद्ध है परन्तु अष्टक वर्ग के अनुस।र सूर्य आदि शुद्ध

हो अर्थात्‌ इनकी अधिक रेखा हों तो शुभ कार्य करना | क्योंकि गोचर का फल स्थूल

है अष्टक वर्ग का फल सूक्ष्म है अष्टक वर्ग की शुद्धिसे कार्य सिद्ध होता है । अष्टकवर्ग

के अनुसार जिस मास में शून्य पड़ा हो उस मास में कलह दुःख. आदि होता है अतः

शुभ कार्य नहीं करना ।.

(२६) पाप ग्रह स्वगृही है तो उस भाव के फल को बढ़ावेगा यदि शत्रु स्थान या

नीच में हो तो पतन या हानि करे।

शुभ ग्रह भी यदि दुष्ट स्थान ६-८-१२ भाव में यदि उच्च का भी हो तो हानिः

करेगा । गत राशि का स्वामी जिस ग्रह के साथ हो वह भी अनिष्ट करता है ।

परन्तु अष्टक वर्ग में रेखा अधिक हो तो शुभ फळ देता है और शुभदायक ग्रह भी

रेखा कम हो तो शुभ फल नहीं देते ।

यदि ग्रह शुभ उच्च या स्वगृही हो अधिक रेखा हो तो फल को दुगुना करता है

अन्यथा होने से उसी क्रम से हीन फल देते हैं ।

!( २७ ) जातक की कुण्डली में अन्योन्य योग हो जैसे लग्नेश धन भाव में धनेश

लग्न में हो जिससे उन्नति प्रकट होती है, तो सर्वाष्टक में लग्न में जितनी रेखा पड़ती

, हों उतने वर्ष के पश्चात्‌ भाग्योन्नति हो । मान लो लग्न में २९ रेखा और धन में ३०

रेखा हो तो उसकी उन्नति २९ या ३० वर्ष में होगी ।

( २८ ) एकादश स्थान में एवं लग्न में बरावर रेखा हों तो रेखा तुल्य वर्ष

बीतने पर राजा से मान धन ओर विद्या की उन्नति हो ।

( २९ ` यदि मकर या कुंभ लग्न हो लग्न में व्ययेश हो, लग्नेश और अष्टमेश

निर्बल हों तो सर्वाष्टकवर्ग में जितनी रेखा लग्न में पड़े उतनी ही आयु हो। .( ३० ) सूर्यं अष्टक कुण्डली में लग्न में जितनी रेखा हों उतने वषं में जातक

की उत्नति होगी ।

„ (३१) चन्द्र और लग्न में बरावर रेखा हो तो उतने वर्ष बीतने पर राजा से

सान धन विद्या आदि प्राप्त हो ।

( ३२ ) लग्न व एकादश में ३०-३० से अधिक रेखा हों तो ४० वर्ष बाद बहुत उन्नति हो और अनेक अधिकार प्राप्त हों ।

( ३३ ) लग्न, नवम, दशम एवं लाभ में ३० रेखा से अधिक हो तो जातक सुखी एवं भाग्यवान्‌ हो ।

( ३४ ) यदि लग्न में २० से कम रेखा हो और तीसरे भाव में ४० से अभिक

रेखा हों तो जातक उच्चाधिकारी होता है ।