सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 144, कुल 454 में से
संदर्भ में पढ़ें१३६ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड
(८) जन्म लग्न ४,५,९ या १० हो उसमें मंगल हो मंगल की ४ रेखा हों तो राजा
तुल्य होता है ।
(९) मंगल हितीयेश होकर षष्ठ स्थान में हो । जहाँ मंगल हो उस राशि की ६
रेखा हों तो शत्रु अधिक हों अल्पायु में ही जातक व्यभिचारी हो ।
(१०) मंगल ६-८ या १२ घर में नीच का या अस्तंगत हो उसके साथ चन्द्रमा
भी हो और जिस राशि में मंगल हो उसमें ६ रेखा हों तो उसका भाई नहीं होता ।
(११) नीच का या अस्तंगत मंगल ६-८ या १२ भाव में हो, मंगल जहाँ हो
उसकी ६ रेखा हों, चन्द्रमा लग्न से केन्द्र में हो, तथा मंगल अष्ट० में चन्द्र जहाँ हो
उस राशि में ६ रेखा हो तो उसका भाई नहीं होता ।
(१२) मंगल केन्द्र में या पंचम में हो मंगल जहाँ हो उस राशि में ४ रेखा हो
तो उसका भाई नहीं होता ।
(१३) मंगल लग्न से तीसरे स्थान में हो वहाँ जो राशि हो उसमें ४ या अधिक
रेखा हो और मंगल पर शुभ ग्रह की दृष्टि भी हो तो कई भाई बहिन हों ।
(१४) मंगल के साथ शनि हो उस राशि में ३ या अधिक रेखा हों तो जातक के
भाइयों की मृत्यु होती है ।
(११) मंगल जहाँ हो या मंगल स्थिति राशि से पंचम या नवम स्थान पर शुभ
ग्रह की दृष्टि हो और मंगल स्थिति राशि या उसके त्रिकोण.की नवम पंचभ राशि पर
जितनी रेखायें हों उतनी संख्या जातक के भाई वहिनो की होगी । जैसे वृश्चिक का
मंगळ है इसके त्रिकोण में मीन और कर्क है । केवल ककं राशि पर उसकी दृष्टि है
ओर किसी पर शुभ दृष्टि पूर्ण नहीं है। मंगल के अष्ट० में कर्क की ३ रेखा हैं तो ३
भाई हैं। यदि शुभ ग्रह की अद्धं पौन आदि दृष्टि हो तो उनका पूर्ण जीवन नहीं रहता ।
(१६) मंगल १, ९ या ९० राशि में नीच या शत्रु गृही न हो। मंगल की उस
राशि में ४ या अधिक रेखा हो तो राज सुख भोगे । र
(१७) मंगल यदि शनि से युक्त या दृष्ट हो मंगल स्थित राशि की ४ या अधिक
रेखा हो तो कई ग्राम का अधिपति हो एवं दण्ड देने का अधिकारी होता है ।
(१८) मंगल बुध से युक्त या दृष्ट होकर लग्न से किसी भाव में हो । मंगल स्थित
राशि में ३ या कम रेखा हों तो आजन्म धन हीन हो।
(१९) मंगल चन्द्र से युक्त या दृष्ट होकर किसी भाव में हो मंगल स्थिति राशि
में ४ या अधिक रेखा हों तो कई ग्रामों का अधिपति हो ।
(२०) मंगल स्वगृही दशम या चतुर्थ में हो और मंगल स्थिति राशि में ४ या
अधिक रेखा हों तो राज्य या किला या दुर्ग का अधिकारी या सेनापति होकर सुखमय
जीवन व्यतीत करता हैः।
(३) उपरोक्त नियम २ का समय जानने का उदाहरण
मंगळ अष्ट० में त्रिकोण शोधनं के पश्चात सबसे अधिक ३ रेखा मिथुन की हैं ।
आम योगपिड ५५ है। ५५ ७८ ३:१६५-- २७-६ईउत्शेष ३ कृतिका नक्षत्र आया