सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 145, कुल 454 में से
संदर्भ में पढ़ेंअष्टक वर्ग विचार : १३७
इसमें या इसके त्रिकोण के नक्षत्र के उ० फा और उ० षा० में जब शनि आयगा तब
घर भूमि आदि प्राप्त होगी स्त्री एवं कुटुम्ब की वृद्धि होगी ।
बुध से चौथे भाव में कुटुम्ब धन पुत्रादि एवं मामा का विचार होता है बुध से
पंचम में मन्त्र विद्या, लिपि ( लिखने की शक्ति ) वुद्धि आदि का विचार होता है ।
(१) बुध के चतुर्थ स्थान की रेखा % बुध योर्गपड -:- २७-शेष नक्षत्र में या
उसके त्रिकोण में जव शनि आये तो बंधु मित्रादि को कष्ट होता है जसे बुध कुम्भ में
है इससे चतुर्थं में वृष राशि है । बुध अष्ट० में वृष में ४ रेखा है योगपिड० है ।
४% ०-० -- २७८-० रेवती नक्षत्र आया । इसमें या इससे त्रिकोण की आश्लेषा
और ज्येष्ठा में जव शनि आयगा तब वंधु मित्रादि को कष्ट होगा ।
या योगपिंड > ३ रेखा=०-- १२८० राशि मीन पर या उससे त्रिकोण कर्क या
वुश्चिक पर जब शनि जायेगा तब मित्रादि को कष्ट होगा ।
(२) इसी प्रकार वुध से पंचम स्थान की रेखा % बुध योगपिड -:- २७-शेष नक्षत्र
में या उसके त्रिकोण के नक्षत्र में जव शनि गोचर में जायगा तब बुद्धि आदि सम्बन्ध
के विषयों में कष्ट होगा या रेखा % योगपिंड + १२-शेष राशि या उसके त्रिकोण में
जब शनि जाये तब उपरोक्न्न वुद्धि सम्बन्धी विषयों का कष्ट होगा ।
(३) बुध लग्न से केन्द्र या त्रिकोण में हो और उसमे ८ रेखा हों तो भाग्यशाली होता है । अपने जातीय व्यवसाय या विद्या में ख्याति पाता है ।
(४) बुध उच्च या स्वगृही हो उस भाव में १, २या ३ ही रेखा हों तो बुध
स्थित भाव के फल की वृद्धि होती है ।
(५) बुध अष्ट» में जिस राशि में सबसे अधिक रेखा हो उस राशि के सौर मास .
में विद्या आरम्भ करने से विद्या में पूणं सफलता हो या विद्या सम्बन्धी कार्यों के
- आरम्भ से उसमें सफलता हो ।
(६) बुध अष्ट० में जिस राशि में कोई रेखा न हो उस राशि में गोचर में जब
शनि जावे तब किसी धन वन्धु या ज्ञाति की मृत्यु हो और उस समय जो सुख भोग
रहा हो उसका नाश हो ।
(७) बुध जिस स्थान में हो उससे द्वितीय स्थान में यदि कोई रेखा न हो तो
जातक गू गा होता है। उक्त द्वितीय स्थान में ३ या कम रेखा हो तो यह सारहीन
चक्ता होता है। ४ रेखा-साध।रण वक्ता, ५-६ रेखा=उत्तम वक्ता ही अपने विषय
का पर्ण रूप से समर्थन कर सकता है । ७ रेखा=वार्ताळाप में कुशल ओर प्रिय उच्च»- कोटि का वक्ता हो ।
(८) बुध से द्वितीय भाव में अपग्रह की रेखा हो तो जातक कठोर एवं व्यंग
बोलने वाला हो । सूयं की रेखा हो तो बुद्धिमानी की बांते एवं विचार पूर्वक बातों
का कहने वाळा हो । शनि की रेखा हो-मिथ्यावादी हो उद्दिग्न करने वाली बातें
करे ( मंगल की रेखा हो-झगडा पैदा करने वाला हो । गुरु को रेखा हो-ताकिक
एवं यु क्ति पूर्ण बहस में कुशल । की-मनोहर भाषी, भाषण में प्रमाणों एवं
कहावतों की झड़ी लगा देने वाला हो 1