भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

पृष्ठ 160, कुल 454 में से

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१५२ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड

है या बुरा है। इसके लिए उसकी जन्म कुंडली देखो उसमें जन्म लग्न के विचार से

सूर्य आदि ग्रह अच्छे हैं या बुरे हैं।

आगे इसका विचार दिया है कि कौन लग्न होने से कौन-कौन ग्रह शुभ या अशुभ हो जाते हैं । ये ग्रह गोचर में जिस स्थान में जावेंगे उस स्थान का सम्बंधीफल उत्पन्न करेंगे । गोचर ग्रह जन्म के ग्रहों से जिस समय अंशात्मक या आसन्न योग करते हैं तव ही उनका ठीक फळ प्रकट होता है !

मनुष्य के जन्म समय ग्रह जिस अंश पर हो जब ठीक उसी राशि ओर अंश पर

गोचर का ग्रह भ्रमण करते हुए पहुंचता है तभी अपना शुभाशुभ फल देने में समर्थ

होता है । ऐसा समझ बैठना कि ग्रहों का राश्यन्त होते हो उस राशि का शुभाशुभ

फल होगा यह समझना सूक्ष्म पद्धति से अशुद्ध है चाहे वह स्थूलमान से ठीक हो । कोई

ग्रह किसी राशि में जन्म होने के पिछले अंशों का फल कैसे दे सकता है जव कि उस

समय उसका जन्म ही नहीं हुआ था । राशि पूरी ३०° की होती है ।

मान लो किसी की वृष राशि है उसमें १५° पर शुक्र है। स्थूल मान से वृष में

शुक्र है । जब शुक्र कन्या राशि में होगा तो पांचवाँ कहा जाता है ! परन्तु सूक्ष्म रूप से

विचार करते हैं तो वृष के १८° से मिथुन के १७° तक १ स्थान हुआ । ककं के १७°

तक दूसरा, सिंह के १७° तक तीसरा, कन्या के १७° तक चौथा ही स्थान हुआ । यहाँ

शुक्र चौथे स्थान का ही फल देगा पांचवें का फल नहीं देगा । आगे तुला के १७° तक

वह पांचवें स्थान का फल देगा । इस प्रकार ग्रह के अंशों के विचार से सूक्ष्म रीति से

विचार कर फल कहना ।

` जन्म लग्नानुसार गोचर फल का बिचार

जन्म कुण्डली के अनुसार मेषादिलग्न में जन्म होने से सूर्यादिग्रह क्या शुभाशुभ

` फल देते हैं यह जान लेना गोचर फळ विचार के लिये आवश्यक है। कोई लग्न होने से

कोन ग्रह शुभ कौन अशुभ है कोन ग्रह मारक होता है आदि हा विचार नीचे दिया. है ।

(१) जन्म लग्न मेष हो तो-शनि, बुध, शुक्र अशभ फलदायक हैं । गुह सूर्य शुभ

फजप्रद हैं । शनि गुरु का संयोग जहां राजकारक है वहां गुरु व्ययेश होने से, शनि

राभेश होने से अन्य प्रकार से पाप फल दायक अवश्य हैं । शनि का जिस समय शुक्र से

सम्वन्ध होता है मारक फल करता है क्योंकि शुक्र यहाँ मारकेश है।

(२) वृष लग्न-शनि, सूर्यं शुभ फक दायक हैं, गुर शुक्र चन्द्र पाप फळ देंगे ।

एक शनि ही राजयोग कारक है पर गुर शुक चन्द्र वुय अनी अपनी दशाओं में अशुभ

फल करेंगे ।

(३) मिथुन छग्न-मंगल, गुरु और सूर्यं अशुभ फल करते हैं। शुक्र शुभ फल

करता है । शनि गुरु का संयोग मेष लग्न के समान ही अशुभ होता है। यदि चन्द्र «

पाप न हुआ तो मारक नहीं होता । बुध शुक्र का संयोग राज योग कारक है। शुक्र

भी व्ययेश होने से कुछ बुरा हो जाता है।

(४) ककं ळग्न-शुक्र वुध अशुभ फल करते हैं । मंगल व गुरु शुभ फ करते हैं

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