सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 161, कुल 454 में से
संदर्भ में पढ़ेंगोचर विचार : १५३
केवल मंगल ही राजयोग कारक है । शनि मारक फल देता है । अन्य ग्रह तो केवल
कष्ट कारक ही हो सकते हैं ।
(५) सिंह लग्न-वुध शुक्र अशुभ, मंगल शुभ, शुक्र गुरु का संयोग शुभ नहीं है ।
बुध आदि ग्रह अपनी दशा अंतर्दशा में मारक फल करते हैं। (६) कन्या रूम्न-मंगल गुरु और चन्द्र पाप फल करते हैं । शुक्र बुध का संयोग
राजयोग कारक है। शुक्र ही विशेष मारक फल दायक है । मंगल आदि अपनी दशा
अंतर्दशा में मारक फल देते हैं ।
(७) तुला लग्न-गुरु सूर्थ मंगल अशुभ हैं | शनि बुश्र शुभ हैं। चन्द्र बुध का
संयोग राजयोग कारक है । गुरु मंगल की दशा अन्तर्दशा में मारक होगा ।
(८) वृश्चिक लग्न-वुध मंगल शुक्र अशुभ । चंद्र गुरु शुभ । सूर्य चन्द्र का योग
राजयोग कारक है । गुरु बुध आदि मारक फल प्रद हैं ।
(९) धनु लग्न-तरुध सूर्यं शुभ । शुक्र अशुभ । सूर्य बुध का संयोग राजयोग कारक
है शुक्र मारकेश. है ।
(१०) मकर-मंगल गुरु चन्द्र पाप प्रद, बुध शुक्र शुभप्रद, मंगल आदि ग्रह अपनी
दशा अन्तर्दशा में मारक फल प्रद है । एक शुक्र ही राजयोग कारक है ।
(११) कुम्भ-गुरु चन्द्र मंगळ पापप्रद है शुक्र शुभ प्रद है । मंगल शुक्र कां संयोग
राजयोग कारक है । गुरु मंगल चन्द्र अपनी दशा अन्तर्दशा में अशुभ फल देंगे ।
(१२) मीन ळग्न-शनि शुक्र सूर्य पाप फल । मंगल चन्द्रमा शुभ फल । मंगल
गुरु का संयोग राजयोग कारक है । केवल मंगल ही मारकेश नहीं हो सकता । शनि
बुध आदि पाप ग्रह भी अपनी दशा अन्तदंशा में मारक फळ देते हैं |
ये ग्रह विशेष लग्न में शुभ-अशुभ क्यों हैं अन्यत्र कारकेश आदि के वर्णन में रये
' हें । ३-६-११ स्थान के स्वामी पाप फल दायक हूँ २-७ के स्वामी मारकेश हैं ५-९
. के शुभ हैं इत्यादि वातों के विचार से यहाँ ग्रहों का शु त्त्र या अशुभत्व वर्णेन किया है ।
गोचर फल में विचारणीय बातें
(१) ग्रह जो शुभ फळ देने वाले हैं या जिसमें वह अच्छा फल देता है उस घर
में हो परन्तु वह नीच या शत्रु घर का या अस्त हो तो प्रभावहीन हो जाता है ।
( २) यह ऐसे नीच शत्रु गृही या अस्त ग्रह गोचर में अलाभ जनक घर में हो
तो अधिक रूप में बुरा फल देगा ।
(३) चन्द्र राशि से गितने पर जब १२- या १ घर में जावे तो पदच्युति धन
हानि जीवन को भय देते हैं ।
( ४ ) सूयं ८ में, मंगल ७वें, राहु ९वें, शुक्र छठे, गुरु तीसरे सूर्य ५वें, शनि पहला,
«बध चौथे स्थान में हो तो धन और मान की हानि करते हैं जीवन को भय देते हैँ ।
( ५) ग्रह अनिष्ट भाव में हो परन्तु उच्च या स्वक्षेत्री हो तो गोचर में वह
हानि नहीं करेया ।