सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 162, कुल 454 में से
संदर्भ में पढ़ें« १५४: सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड
( ६ ) शुभ फल देने वाले ग्रह की या शुभ ग्रह की दृष्टि हो और पाप ग्रह की भी
दृष्टि हो या शत्रु ग्रह से दृष्ट हो तो दोनों का प्रभाव जाता रहेगा । |
( ७ ) शुक्र ६-७-१० स्यान में गोचर में सिंह के समान भयानक होता है यदि
-इनके विपरीत वेध स्थान में कोई ग्रह न हो ।
(८) जम्म राशि से १, २, ४, ५, ७, ८, १२, वें स्थान में पड़ा सूर्य शनि मंगल
. राहु धन और प्राण का नाश करते हैं।
(९ ) जन्म पत्री में चन्द्रमा यदि ६-८-१२ वें स्थान में पड़ा हो और गोचर में
भ्रमण करते हुए जिस समय शनि, राहु या केतु या चन्द्र के पास पहुँचे उसी समय
संकट उपस्थित होगा, रोग होगा । .
( १०) सिंह राशि के चन्द्र और मंगल चतुर्थ में एकत्र हों तो बाल्यावस्था हीमें
जिस समय गोचर में किसी पाप ग्रह का संयोग या दृष्टि होगी उसी समय मातृ सुख
में विघ्न आयगा 1 र
( ११ ) नवम या-दशम स्थान में शनि पड़ा हो जिस समय उसका किसी गोचर के
पाप ग्रह से सम्बन्ध होगा तो सूर्य पितृ का कारक होने के कारण पितृ सुख“में विघ्न
होगा । सूर्यं के समीप जिस समय गोचर में शनि पहुँचेगा तब पिता की चिन्ता
खड़ी होगी । ps
तुला का सूर्यं नीच का होता है और तुळा या मेष पर शनि होगा तव पिता
. का नाश होगा, या अरिष्ट होगा । दि
( १३ ) लग्न में सूर्य हो यदि गोचर में लग्न में शनि आय तो शरीर पीड़ा होगी ।
(१४) लर्न में सूर्यं हो यदि गोचर में सप्तम में शनि आय तो स्त्रीचिन्ता होगी ।
(१५) घन में सूर्यं हो यदि गोचर में .धन में या अष्टम में शनि आय तो नेत्र
पीड़ा, आथिक बड़चन कुटुम्व की चिन्ता आदि होगी ।
(१६) तृतीय में सूर्य हो और ३ या ९ घर में शनि पहुँचे तो कर्णपीड़ा बंधु-
कलह आदि होगा ।
(१७) चतुर्थ में सूये हो और ४ या १० घर में शनि पहुँचे तो माता पिता की
चिन्ता, उदर विकार, हृदय रोग, व्यापार चिता आदि होगी ।
( १८ ) पंचम में सूर्य हो और ५ या ११ में शनि पहुँचे तो संतान की चिन्ता हो ।
( १९ ) षष्ठ में सूर्यं हो और ६ या १२ में शनि पहुंचे तो शत्रु और ऋण चिता
पड़े । इसी प्रकार जिस स्थान में सूर्य जन्म में पड़ा हो उस स्थान पर या उससे सप्तम
में शनि पहुंचे तो उस स्थान सम्बन्धी पीड़ा होगी ।
. (.२० ) इसी प्रकार नवम में गुरु बलवान् होगा तो ९, २१, ३३, ४५, ६९ वर्ष
की आयु में भाग्योदय या लाभ होगा । -
. (२१) धन स्थान में जन्म में मंगल होगा तो २, १४, २६, ३८, ५०, ६२ वर्ष
की आयु में धन से कष्ट, कुटुम्ब की चिता ऋण चिता आदि होगी ।
(२२ ) चन्द्र शुभ भाव में भी पाप ग्रहों के बीच तथा पाप युक्त और पाप ग्रहों
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