भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

पृष्ठ 163, कुल 454 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 163

गोचर विचार : १५%

से सप्तम भाव में हो तो अशुभ फल देगा ।

यदि शुभ ग्रह शुभ नवांश में या अधिमित्र नवांश में हो और गुरु से दृष्ट हो तो अशुभ भी हो तो शुभ फल देगा ।

गोचर में किस स्थान से क्या-क्या विचारता

(१) प्रथम स्थान--शरीर सुख, उत्साह, प्रयास, महत्त्वाकांक्षा आदि ।

(२) द्वितीय स्थान--द्रव्य संचय, सम्पत्ति की स्थिति, कुटुम्ब, आभूषण आदि ।

(३) तृतीय स्थान--बन्धु, उद्योग, पराक्रम, महत्त्वाकांक्षा, प्रयास, गुप्त शत्रु,

ज्येष्ठ वन्धु का विचार ।

(४) चतुर्थं स्थान--घर, जमीन, वाहन, कीति, सुख, राजकीय बंधन योग,तलधरा,

मृत मनुष्यों का धन ।

(५) पंचम स्थान--संतति, बुद्धि, आत्म मिलन, उद्योग की दिशा, व्यापार में

यश-अपयश, मातृधन ।

(६) षष्ठ स्थान--रोग, मामा, मौसी, गुप्त शत्रु, सेवक, मित्र, लोक विरोध ।

(७) सप्तम स्थान--विवाहित स्त्री सुख या पति सुख, मुकदमा, प्रीत, स्त्री का

रूप, प्रत्यक्ष शत्रु, वैद्यक, स्थलांतर ।

(८) अष्टम स्थान--कष्ट, अपमान, फौजदारी, श्वसुर आदि की स्थिति, पर-स्त्री

सम्बन्ध, विवाह से धन, अकस्मात्‌ लाभ, मृत्युपत्र से धन प्राप्ति ।

(५) नवम स्थान--भाग्योदय, यश, उत्कर्ष, धमं, समाजसेवा, सार्वजनिक कायं,

राजकीय संस्था से सम्बन्ध, लम्बी यात्रा, मुद्रण कला 4

(१०) दशम स्थान--रोजगार, नौकरी, अधिकार, राजदरबार, सामाजिक

सम्भान, पिता का विचार, प्रतिष्ठितता, चोरी का धन, ज्येष्ठ बन्धु की मृत्यु ।

(११) एकादश स्थान, लाभ, वन्धु सुख, मित्र, नवीन कार्य की योजना, पिता का

धन, माता की मृत्यु, पुत्र के शत्रु ।

(१२) द्वादश स्थान--शत्रु पीड़ा, संकट, द्रव्य नाश, मनुष्य हानि, उद्योग, ऋण

योग, आत्महत्या, हत्या, पूर्वाजित सम्पत्ति, गुप्त शत्रु, जेलखाना ।

जन्म नक्षत्र के चरण अनुसार गोचर में दिन का फल

किस नक्षत्र के किस चरण में जन्म हुआ यह जानकर गोचर में देखना कि गोचर

में जन्म नक्षत्र का यह चरण किस दिन पड़ता है। उस दिन के विचार से उस मास

का गोचर फल इस प्रकार होगा ।

ग्रहों का गोचर फल

सूर्यं का गोचर फल १२ भाव

(१) रविवार--उस मास में घूमा फिरी करने से व्यस्त होगा ।

(२) सोमवार--उस मास में अच्छा फल हो, उत्तम भोजन की प्राप्ति हो ।

(३) मंगलवार--उस मास में आलती हो, अग्नि भय हो ।