सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 165, कुल 454 में से
संदर्भ में पढ़ेंAO EO डर आसाम ` काका FE
गोचर विचार : १५७
३--धन की प्राप्ति, वस्त्रादि का सुख, आरोग्य, शत्रुओं का पराजय, चित्त में
प्रसन्नता, धैय, इच्छित स्त्रियों का सङ्ग, सफलता प्राप्त ।
४--स्वजनों से झगड़ा, चित्त में चञ्चलता, कुक्षि पीड़ा, कार्य में हानि, भोजन
और निद्रा में असुविधाएँ, जल से भय ।
५--मार्ग में विघ्न, कायं नाश मन में अशान्ति, आसक्ति, धन या किसी प्रिय
पदार्थ की हानि वायु का प्रकोप, गठिया रोग, शोक ।
६--लाभ, स्वस्थता, घनागम, यश, आनन्द, स्त्रियों से वार्तालाप, अपने घर में
निवास, शत्रुओं का पराजय, रोग का विनाश ।
७--धन, सुख, वाहन, ख्याति, स्वास्थ्य, शान्ति, भोजन सुख एवं स्त्री द्वारा सुख।
८--रोग, अपच, झिल्ल्यों में पीड़ा, झगड़ा, चिन्ता, सपं भय, खाद्य भोजन
की प्राप्ति, अनहोनी वात हो ।
९--राजा से भय, वस्त्रादि की हानि, पुत्रों से मतभेद, देश का त्याग, उदर रोग,
व्यवस्था में हानि, विमारी ।
१० सुख, अभीष्ट सिद्धि, कार्यं में सफलता एवं स्वस्थता ।
११--छाभ, सुख, कुटुम्वियों से समागम, उत्तम भोजन, द्रव्य एवं अन्न की
प्राप्ति, आनन्द ।
१२--शोक. मानसिक एवं शारीरिक व्यथा, मान, कार्य और द्रव्य की हानि,
कुटुम्वियों की ओर से घृणा, व्यय ।
टिप्पणी--२-५-९ स्थानों में चन्द्र का अशुभ फल कहा है यह क्षीण चन्द्रमा का
फळ है । पूर्ण चन्द्र होने से शुभ फल होता है ।
३-मङ्गल के प्रत्येक भाव का गोचर फल
१--ज्वर-ब्रण, कुट्म्व एवं स्त्री से मतभेद, दुजंनों से कष्ट तथा भय, मन उदास,
बन्धुओ से वियोग, रक्त अशुद्ध का रोग, पित्त या गर्मी से रोग।
२--बल की हानि, मानसिक अशान्ति, कार्यो में निष्फलता, कठोर बचन, दुर्जनों
की संगति, राजा चोर अग्नि तथा पित्त रोग से भय, धन हानि, भय।
३--धन, खाने के पदार्थ, .ऊनी वस्त्र एवं आरोग्य की प्राप्ति, शत्रु की पराजय,
प्रत्येक कार्य में सफलता, सुख, स्वर्ण भूषण प्राप्ति ।
४--शत्रु बृद्धि, रुपया एवं वस्तुओं की कमी, स्वजनों से विरोध, अशुभ कार्य
निरत, मानसिक भय, ज्वर रुधिर तथा उदर रोग, स्थान हानि, वन्धुओं द्वारा शोक ।
५--धन नाश, भोजन में अतिकाल, पाप कमं में योग, शत्रुओं से पीड़ा, सन्तान
से दुःख, ज्वर, अनुचित इच्छा, मानसिक त्रास, पुत्र या बन्धुओ से झगडा ।
६--धन, अन्न, वस्त्र, सुवणं या तामू पश्र की प्राप्ति, ख्याति, लाभ, आनन्द, शत्रु
भयहीन, शुभ विचार, उदय, रोग से छ,उकारा, जीत, धन, लाभ, सब कार्यों में
सफलता, झगड़े का अन्त ।