सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंगोचर विचार : १५९
की हानि, देश का त्याग, अधिक खर्च, अन्यमत से बैर । २- धन और सुख की प्राप्ति, ख्याति, उन्नति,शत्रुहोन तथा दानादि में रुचि,प्रभाव।
३--पीड़ा, विघ्न, कुटूम्वियों से झगड़ा. रोजगार में झंझट, स्थान से च्युति, शरीर में पीड़ा, रोग, पिता की मृत्यु ।
४--मन में अशांति, धन एवं कांति की हानि, शत्रु की वृद्धि, कुटुम्बियो से असु-
विधा, देश का त्याग, बंधु द्वारा शोक, अपमान, पशु भय ।
५--सुख, उन्नति, धनागम, कायं में सफलता, कुटुम्बियों से आनन्द, पद की प्राप्ति, संतान प्राप्ति, राजानुकूल से मित्रता ।
६--शोक, स्त्री, संतान और कुटुस्बियों से झगड़ा, अग्नि चोर राजा से भय, गह
में सब प्रकार की उदासीनता, शत्रु से एवं रोग से पीड़ित ।
७--राजा से मान, उत्तम भोजन, कायं में सफलता, आरोग्य, वुद्धि में चमत्कार,
अनेक सुखों का योग, विवाह आदि उत्सवों में सुख, शुभ कार्य में यात्रा स्त्री एवं
संतान सुख ।
८--शोक, रोग, चोर अग्नि राजा से भय, क्रोध की वृद्धि, वाक्य में कठोरता,
कांति की हानि, पद च्युति, शारीरिक कष्ट, त्रास जनक यात्रा से थकावट, दुःखी, धन हानि, अभाग्यवान् ।
९--धन की प्राप्ति सुख, उत्तम भोजन, स्त्री, सहवास, पुत्र से सुख, विचार
शीलता, घर की प्राप्ति, सब प्रकार की उन्नति ।
१०--हीनता, अन्न तथा धन की हानि, स्वजनों से अपवाद, निरुद्यमता, अपवाद,
स्थान और जायदाद का भय, संतान भय ।
११--धन एवं प्रतिष्ठा की वृद्धि, कांति, बल, आनन्द, शत्रुओं की हानि, समस्त
कार्यो में सफलता, संतान प्राप्त, नया पद, मान ।
१२--दरिद्रता का दुःख, विश्वास पात्रों से कलंक, निवास स्थान का त्याग, शुभ
कार्यों में धन का व्यय, मुकदमे बाजी । द्रव्य के कारण दुःख और भय ।
६. शुक्र का प्रत्येक भाव का गोचर फल
१--सुख और धन की प्राप्ति, शत्रु का नाश हो, जातक दुराचारौ हो, सब प्रकार
का भोग भोगे ।
१--धन की वारम्वार प्राप्ति, स्त्री से सुख, मान की वृद्धि, शरीर में नीरोगता;
वस्त्रादि की प्राप्ति, सव प्रकार से सुख ।
३--व्यवसाय में हानि, धन की कमी, रोजगार में गडबडी, शत्रुओं की वृद्धि, मतां-
तर से प्रसन्नता, पद की प्राप्ति, तरवक्री ।
४--धन की प्राप्ति, मनमानी वातों का करना, मित्र कुटुम्ब एवं स्त्री का सुख,
स्त्री सहवास । भरे र ४--पुत्र और कुटुम्ब से प्रीति, नौकरों की वृद्धि, लाभ, अन्त एवं धन की प्राप्ति,
अच्छे भोजन का सौभाग्य, प्राप्त ।