सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 168, कुल 454 में से
संदर्भ में पढ़ें१६० : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड
६--शत्रु की वृद्धि एवं उससे हानि, दायभागियों से झगड़ा, पुत्र तथा संतान से
मनोव्यथा, विपत्ति ।
७--शोक, बड़े परिश्रम से जीविका निर्वाह, जननेन्द्रिय रोग का भय, किसी से
अपमानित होने का भय, स्त्री की पीड़ा ।
८--धन की प्राप्ति, सुख की वृद्धि, दुःख की समाप्ति ।
९--उत्तम वस्त्र आदि का लाभ, इच्छित पदार्थों की प्राप्यि, स्वस्थता सुख ।
१०--पीड़ा, मानसिक व्यथा, धन की हानि, शत्रुओं से भय, निवंलता, स्त्रियों से
दुःख, कलह ।
११--धन की प्राप्ति, प्रताप, कार्य में सफलत।, धन का आगमन, उत्तम भोजन
की प्राप्ति, अभय ।
१२--शस्त्र एवं चोर से भय, सब कार्यो में विघ्न बाधा, मतांतर से धन तथा
वस्त्रादि लाभ ।
शनि का गोचर फल प्रत्येक भाव का
१--वुद्धि भ्रंश, शरीर निस्तेज, मानसिक और शारीरिक पीड़ा, रोग, कुटुम्बियों
से झगड़ा, दाह क्रिया करे ।
२--क्लेश, वेवात का झगड़ा, स्वजनो से बैर, घन की हानि, कार्य में सफलता,
संतान हानि ।
३--आरोग्य, सुख, कार्यो में सफलता, पद, धन एवं नौकरी की प्राप्ति परन्तु
दुराचरण शीलता होती है ।
४--शत्रु की वृद्धि, रोग, स्थान का परिवतंन, स्त्री और कुटुम्वियों से वियोग, धन
की कमी परन्तु अन्न को प्राप्ति, धन हानि ।
५--अशान्ति, कायं में सफलता, कुटुम्बियों में मुकदमेबाजी, पुत्र से वियोग, धन
एवं सुख की हानि, दुष्ट स्त्रियों का संग, परेशानी, संतान हानि, मतांतर से पुत्र से सुख ।
६--धन, अन्न और सुख की वृद्धि, कुटुम्ध एवं स्त्रीगण से सुख, शत्रु पर विजय,
मकान बनाने का सौभाग्य ।
७--दोष, मानसिक व्यथा, धन की हानि, परदेश वास, स्त्री को पीड़ा, यात्रा,
भय से उद्वेग ।
८--पीड़ा, द्रव्य की हानि, कार्य में निष्फलता, अव्यवस्थित जीवन एवं रोग,
संतान हानि, पशु मित्र घन हानि।
९दुःख, रोग,शत्रु की वृद्धि, कभी-कभी धन की प्राप्ति । इसी प्रकार स्त्री तथा
संतान से कभी सुख एवं कभी असुविधा, धन हानि, अच्छे कार्यों में वाधा, पिता बंघु
की मृत्यु, लगातार शोक ।
१०- दुःख मानसिक व्यथा, पाप कमं, नौकरी एवं रोजगार में विघ्न वाधा,
निर्धनता, हृदयरोग से पीड़ित, मान हानि ।