भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

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गोचर विचार : १६५

४--बुध १ राशि पर १ मास रहता है सवंकाल फल देता है ।

५--गुरु १ राशि पर १३ मास रहता है मध्य के २ मास फल देता है ।

६--शुक्र १ राशि पर १ मास रहता है मध्य के ७ दिन फल देता है ।

७--शनि १ राशि पर २० मास रहता है अन्त के ६ मास फल देता है ।

८---राहु केतु १ राशि पर १८ मास रहता है अन्त के २ मास फल देता है ।

गोचर में नक्षत्र के विचार से ग्रहों के अंग और फल

जन्म नक्षत्र से गिनने पर २७ नक्षत्र जांतक के अंग विभाग में ग्रहों के अनुप्तार

वटे हैं वे नीचे बताये गरे हैं । जन्म नक्षत्र को १ गिन कर आगे वताये क्रमानुसार अंग

की गणना करना । वर्तमान नक्षत्र जिस अंग में पड़े फल विचारना ।

सूर्य का गोचर में अंग विभाग और फल

जन्म नक्षत्र से नक्षत्रों का क्रम अंग विभाग फल

१--पहिला नक्षत्र मुख हानि

२--२, ३, ४ और ४ वां नक्षत्र सिर धन वृद्धि

३--६, ७, ८ और १९ वाँ नक्षत्र छाती सफलता'

४---१०, ११, १२ और १३ वाँ नक्षत्र दाहिना हाथ सम्पत्ति लाभ

५--१४,१५,१६,१७,१८,१९ वाँ नक्षत्र दोनों पैर धन हानि

६--२०, २१, २२, २३ वाँ नक्षत्र बायाँ हाथ शारीरिक बीमारी

७--२४, २५ वां नक्षत्र दोनों आँख लाभ

८--२६ और २७ वाँ नक्षत्र जननेन्द्रिय जीवन को भय

चन्द्र का अंग विभाग के अनुसार गोचर फल

जन्म नक्षत्र से वर्तमान नक्षत्र तक अंग विभाग फल

१--पहिला और दूसरा नक्षत्र चेहरा अतिशय भय

२--३, ४, ५, ६ वाँ नक्षत्र सिर रक्षा

३-७, ८ वाँ नक्षत्र पीठ शत्रु दमन

४-९, १० वां नक्षत्र दोनों आँख सम्पत्ति लाभ

५-११, १२, १३, १४, १५ वाँ नक्षत्र छाती मानसिक सुख

६-१६, १७, १८ वाँ नक्षत्र वाँया हाथ कलह

७-१९,२०,२१,२२,२३,२४ वाँ नक्षत्र दोनों पैर विदेश यात्रा

८-२५, २६, २७ वाँ नक्षत्र दाहिना हाथ सम्पत्ति लाभ

मंगल का अंगविभाग के अनुसार गोचर फल

जन्म नक्षत्र से बर्तमान नक्षत्र तक संख्या अंग विभाग फल

१--पहिला दूसरा नक्षत्र मुख जीवन को भय

२--३, ४, ५, ६, ७, ८ वाँ नक्षत्र दोनों पैर कलह

३--९, १०, ११ वाँ नक्षत्र छाती सफलता

४--१२, १३, १४, १५ वाँ नक्षत्र बायां हाथ गरीबी