सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 188, कुल 454 में से
संदर्भ में पढ़ें१८० : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड
२ मंगल से गिनने पर तीसरा नक्षत्र पुरोलत्ता है अर्थात् आगे की लात (सीधी गिनती)
३ गुरु से गिनने पर छठा नक्षत्र पुरोलत्ता है अर्थात् आगे की लात (सीधी गिनती)
४ शनि से गिनने पर आठवां नक्षत्र पुरोलत्ता है अर्थात् आगे की लात (सीधी गिनती)
५ शुक्र से गिनने पर पाँचवां नक्षत्र पुष्ठा लत्ता है अर्थात् पीछे की लात (उल्टी गिनती)
६ बुध से गिनने पर सातवां नक्षत्र पृष्ठा लत्ता है अर्थात् पीछे की लात (उल्टी गिनती)
७ राहु से गिनने पर नवां नक्षत्र पृष्ठा लत्ता है अर्थात् पीछे की ळात (उल्टी गिनती)
८ चंद्र से गिनने पर २२वाँ नक्षत्र पृष्ठा लत्ता है अर्थात् पीछे की लात (उल्टी गिनती)
इस प्रकार गोचर के अनुसार ग्रह के नक्षत्र से जन्म नक्षत्र तक गिनने पर उपरोक्त
लत्ता तारा आ जावे तो बीमारियाँ व्यथा हो ।
१-मान छो सूर्य गोचर में मूल नक्षत्र १९ वें नक्षत्र में है इससे सीघा १२ गिना
तो १२वाँ नक्षत्र कृतिका आया । यदि जन्म नक्षत्र कृतिका हो तो बीमारी होगी ।
२-मान लो शुक्र श्रवण में है शुक्र का पृष्ठ लत्ता पाँचवां है तो श्रवण से उल्टा
गिना १ श्रवण २ उ०्षा० ४ मूल, ५ ज्येष्ठा आया यदि ज्येष्ठा अन्म नक्षत्र हो तो
बीमारी होगी इसी प्रकार सब ग्रहों का पुरोलत्ता या पृष्ठ लत्ता विचारे ।
लत्ता फल
सूर्यं लत्ता में-सब व्यापार में हानि ।
राहु केतु लत्ता में-दुःख ।
शुक्र लत्ता में-कलह ।
चन्द्र लत्ता में-बडी हानि ।
गुरु लत्ता में-मृत्यु, बन्धुद्दानि, सावेजनिक भय या अरक्षिता हो ।
बुध छत्ता में-स्थान हानि या इसी प्रकार के बुरे फल ।
जब २ या अधिक लत्ता साथ पड़े तो अनुपात से दुगुना या तिगुना बुरा फळ
सबके मेल से विचारना । त
वेघ का प्रकार |
जब ग्रह गति में वक्री हो तो उसकी दृष्टि दाहिनी ओर रहती है ।
जब ग्रह गति में सीधा हो तो उसकी दृष्टि बाइ ओर रहती है ।
जब ग्रह गति में मध्य हो तो उसकी दृष्टि सामने की ओर रहती है ।
यह विचार मंगल आदि ५ ग्रहों का है ।
राहु केतु सदा वक्री हैं उनका वेध दाहिनी ओर होगा ।
सूर्य चन्द्र सदा मार्गी हैं उनका वेध बाइं ओर होगा ।
गति में समता न होने से ग्रहों के यहाँ ३ प्रकार के वेध बताये गये हैं|
अशुभ वेध-कोई तिथि राशि या अंश या नक्षत्र पाप ग्रह से वेध हो तब उसे
शुभ कार्यों में त्याग देना ।
वेध में विवाह करने से सुखी नहीं होता । यात्रा में उन्नतिशील नहीं होगा ।
रोगी को दवा करने में अच्छा न होगा । व्यापार करने में सफलता नहीं होगी ।