भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

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सवंतोभद्र चक्र: १८१

पाप ग्रहों के वेध में जब ग्रह वक्री हो तो वहुत बुरा फल देता है यः मृत्यु देता है।

शुभ ग्रहों के वेध में जव ग्रह हो तो अच्छा फल होता है।

पाप और शुभ ग्रह जब शीघ्र में हों तो उस ग्रह का स्वभाव ग्रहण कर लेते हैं

जिसके साथ कि वे रहते हैं ।

ग्रह वेध फल

सूर्य का वेध हो तो-मनोमालिन्य हो, मन में ताप ।

भंगल का वेध हो तो-धन हानि ।

शनि का वेध हो तो-रोग से पीडित ।

राहु केतु का वेध हो तो-बाधा विघ्न हो ।

चन्द्र का वेध हो तो-मिश्र फल ( शुभाशुभ ) ।

शुक्र का वेध हो तो-स्त्री भोग, अन्य मत में शत्रु वृद्धि ।

बुध का वेध हो तो-ज्ञान वृद्धि ।

गुरु का वेध हो तो-सदा अच्छा फल । ५

वेध कारक ग्रह यदि-वक्री हो-प्रभाव दुगुना हो, उच्च में-प्रभाव तिगुना हो, गति

( मार्गी ) साधारण फल, नीच में आधा फल ।

पाप ग्रह बुरा फल देता है शुभ ग्रह अच्छा फल देता है।

परन्तु शुभ ग्रह पाप ग्रह के साथ हो तो अच्छा फल नहीं देता ।

पाप ग्रह वेध में यदि वक्री ग्रह हो तो मृत्यु फल देता है।

गति शीघ्री हो तो बीमारी शीघ्र अच्छी होती है।

पाप ग्रह का वेध अपने जन्म दिन में हो तो मानसिक पीड़ा हो मन में शांति नमिले;

१ करूर ग्रह के वेध से उद्वेग यां लड़ाई में खतरा ।

२ क्रूर ग्रह के वेध से-हानि, धन हानि ।

३ क्रूर ग्रह के वेध से-भंग या बाधा ।

४ क्रूर ग्रह के वेध से-मृत्यु ।

(१) सूर्ये गोचर में ३ राशि वृष मिथुन कके (जो पूर्व में है) वह दिशा अन्त समझी

जावेगी शेष ३ दृश्य समझी जावेगी ।

(२) स्वर अ. उ. छू. ओर बो. जो उत्तर पू में हैं इन्हें पूवं दिशा का समझना ।

स्वर आ. ऊ. लू और ओ. जो दक्षिण पूर्व में हैं उन्हें भी पूर्व दिशा का समझना ।

स्वर इ ए ओर अं जो दक्षिण पश्चिम में है उन्हें पश्चिम का समझना । स्वर ई ऋ ए

और अः जो पश्चिम-उत्तर में है उन्हें पश्चिम का समझना ।

(३) यदि विशेष दिशा में जिसमें सूयं ( ३ राशियों में ) ३ मास तक ठहुहता है

सबै नक्षत्र स्वर, राशि और तिथि उस दिशा की अस्त समझी जाती है ।

(४) जब नक्षत्र अस्त हो वहाँ वेध हो तो बीमारी भ्रम हो ।

जब व्यंजन अस्त हो वहाँ वेध हो तो-हानि ।

जब स्वर अस्त हो वहाँ वेध हो तो-शोक, व्याधि ।