भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

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१८२ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड ०

जब राशि अस्त हो वहाँ वेध हो तो-बाध ।

जब तिथि अस्त हो वहाँ वेध हो तो-भय उत्पन्न हो ।

जब ये पाँचों अस्त हों तो-निश्चय मृत्यु हो ।

(५) जिस दिशा की ओर जो अस्त हो-यात्रा युद्ध विवाद नया द्वार या मह

अटारी बनाना या और भी इसी प्रकार के शुभ कार्य नहीं करना ।

(६) जिसके नाम का आदि अक्षर अस्त हो तो उस समय वह अभाग्यवान्‌ हो ।

मनुष्य जिसके नाम का अक्षर अस्त है तो कविता या प्रतिरोध, किला, युद्ध आदिमें `

यदि सफलता चाहता है तो उस अस्त दिशा को त्याग देना।

(७) कोई नक्षत्र किसी उदय दिशा में हो और वेध हो तो बढ़ती हो ।

वेध यदि व्यंजन में हो तो-लाभ हो

वेध यदि स्वर में हो तो-सुख

वेध यदि राशि में हो तो-सफलता

वेध यदि तिथि में हो तो-प्रसिद्धता

यदि पाँचों का वेध हो तो स्थान सुरक्षित रहे ।

(८) जब पाप ग्रह से वेध हो और दोनों बाजू ( दाहिने और बायें बाजू ) व्यं-

जन, तिथि,स्वर, राशि और नक्षत्र से कोई समय वेध हो तो उसकी निश्चित मृत्यु हो।

जब पाप ग्रह का वेध हो और उपग्रह भी हो तो रोग या लड़ाई में मृत्यु होती है।

यहाँ उपग्रह ५ हैं इतका विचार

सूर्य स्थान से गिनने पर इस प्रकार नाम हैं

(१) सूर्य से पाचवा तारा=विदयुन्मुख जब गोचर में इनमें किसी. स्थान

(२) सूयं से आठवा तारा=शूर में ये उपग्रह हों तो कोई शुभ

(३) सूर्य से १४ वाँ तारा=्सन्तिपात कार्य नहीं करना । उस समय

(४) सूर्य से १८ वाँ तारा=केतु कोई काय करो तो वाधा होती

(५) सूर्य से २१ बाँ तारा=उल्का है।

(६) सूर्य से २२ वाँ तारा-कम्प

(७) सूर्य से २३ वाँ तारा=्वप्त्रक

(८) सूर्यं से २४ वाँ तारा=निर्घात

जन्म नक्षत्र से गिनने पर नक्षत्रों के नाम--

(१) जन्मभा, जन्मक्षे=जन्म समय जिस नक्षत्र पर चन्द्र हो ।

(२) कमं=्कमंख, कमंभ= नं० १ से १० वां नक्षत्र

(३) आधान- 5) 0007

(४) विनाश, विनाशन, वैनाशिक २३ वाँ,

(५) सामुद्रिक —- » १वाँ,,

(६) संघातिक ¬ छ» ष्वा,

(७) जाति SS 11) २७ वाँ 34