भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

पृष्ठ 191, कुल 454 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 191

सर्वतोभद्र चक्र: १८३

(ऽ) देश -- नं० १ से २७ वाँ नक्षत्र (९) अभिषेक — _,, रष्वा, जन्म नक्षत्र का वेध इनमें से किसी में हो तो नीचे लिखा फल होगा- वेधफल

नक्षत्र या तारा जन्म तारा पापग्रह शुभ ग्रह युद्ध समय पर ग्रह वेध

नाम से संख्या वेध फल वेध फल

१ जन्मक्षं पहिला मृत्यु शुभ भय

२ कमं १० वां शोक, क्लेश शुभ असफलता

३ आधान १९ वां स्थान परिवतंन शुभ घात खून खराबी

रः बुद्धि प्रवेश ]

४ विनाश २३ वां बन्धु से कलह शुभ मृत्यु अपयश

५ सामुद्रिक १८ वां बुरा अनहोनी ;ष्ट शुभ भंग युक्त स्थिति

६ संघातिक १६ वां हानि शुभ

७ जाति २६ वां कुटुम्बनाश शुभ

८ देश २७ वां देश निकाला शुभ

९ अभिषेक २८ वां बंधन शुभ

इन नक्षत्रों में यात्रा विवाह आदि मंगल कार्य वर्जित हैं। उपग्रह में भी वेध हो

तो मृत्यु ।

बंधकारक ग्रहशुभ या अशुम हो जिस दिन वेध हो व शुभ या अशुभ समझे जायेंगे ॥

चन्द्रवेध में लगातार हो तिथि या नक्षत्र स्वर राशि और व्यंजन से किसी दिन

वेध हो तो वेधकारक ग्रह जैसा शुभ या अशुभ हो उसके अनुसार वहू दिन शुभ या

अशुभ समझा जायेगा ।

बाल युवा आदि स्वर जानता

जिस समय कोई तिथि में कोई प्रश्न हो उसका विचार करने को तिथि की भुक्त

घड़ी की संख्या को पल बनाकर ५ का भाग देवें जो शेष बचे उससे स्वर समझें ।

स्वर नाम--(१) बाळ (२) कुमार (३) युवा (४) वृद्ध (५) मृत्यु स्वर ।

फल-बाल स्वर = किंचित लाभ ) इनमें से जो स्वर जिसके पञ्चम

कुमार स्वर ८ अद्ध लाभ स्थान में हो वह स्वर मृत्यु देने वाला

युवा स्वर > सवं सिद्धि ? होता है ।

वृद्ध स्वर = हानि |

मृत्यु स्वर = क्षय ]

किसी उद्देश्य से प्रश्न पूछे तो उसके अनुसार फल कहना जैसे--

बाल स्वर युवा स्वर वृद्ध स्वर मृत्यु स्वर

लाभ विषय स्वल्प लाभ राज लाभ लाभ न हो जिस प्रयोजन का

रोग विषय चिर काल तक तत्‌ क्षण क्लेशनाश क्लेश बढे प्रश्‍न हो उस कारण

रोग