सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 201, कुल 454 में से
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सुयंकालानल चक्र : १९१
'लिखना गोचर में सूयं जिस नक्षत्र में है वह नक्षत्र यहाँ लिखना । इस प्रकार अभिजित सहित २८ नक्षत्रों के नाम आगे क्रमानुसार लिख देना यहाँ बताये हुए बाई ओर से क्रमशः लिखना । अपने नाम का नक्षत्र जहाँ हो वहाँ लिख देना इससे रोग विवाद, युद्ध, यात्रा आदि में इससे विचार होता है।
फल
१--नीचे (त्रिशूल वाली रेखा के नीचे) के नक्षत्रों में अपना जन्म नक्षत्र पड़े तो क्रम से १-चिन्ता २-वध ३-सब कार्यों में रुकावट हो ।
२--दोनों श्युग में-रोग और भय ।
३--त्रिशूल में मृत्यु ।
४--शेष नक्षत्रों में-जय लाभ अभीष्ट सिद्धि हो :
५--जन्म राशि से ग्रहों के वेध का इस प्रकार फल होगा
सूर्य के वेध से-मन को ताप गुरु के वेध से-धन लाभ।
मंगल के वेध से-द्रव्य हानि शुक्र के वेध से-रत्न लाभ ।
शनि के वेध से-रोग जन्य पीड़ा चन्द्र के वेध से-स्त्री लाभ।
राहु केतु के वेध से-मृत्यु बुध के वेध से-सुख ।
'डिभ चक्र या सूर्य नराकार चक्र--
सूर्यं जिस नक्षत्र में हो उसे सिर पर स्थापित कर वहाँ से जन्म नक्षत्र तक गिनने
में जिस अंग पर जन्म नक्षत्र पड़े उससे निम्नलिखित फल का विचार करे ।
नक्षत्र संख्या अंग फल
३--सिर-श्रेष्ठ रत्न, सोना, सुन्दर वस्त्र, भोजन, राज्य सुख प्राप्त ।
४--मुख-मिष्ट भोजन, शैया आदि आसनों का भोगी व बोलने वाला, हंसता मुख सदा प्रसन्न चित्त।
1--दाहिना कंधा-त्रंश में भूषण समान, बड़े उत्सव युक्त, अति उदार, बड़ा "शर वीर ।
१--बायाँ कंधा-अग्रणी, हाथी पर चढ़ने वाळा ।
२-दाहिनी बाँह-अपने देश को त्यागे, वड़ा अभिमानी, वीरता युक्त परदेश में रहकर ।
१--बाई बाँह-बड़ी प्रतिष्ठा प्राप्त करता है, स्थान भ्रष्ट ।
१--दाहिना हाथ-उदार, श्रेष्ठ गुणरहित,व्यापार में रत्नों की परीक्षा करनेवाला ।
१--बायां हाथ-सच और झूठ सहित चोर हो ।
५--हृदय में-स्व कुटम्ब में राजा के समान श्रेष्ठ शील वाला, शास्त्र में प्रवीण विशाल श्रेष्ठ यज्ञस्वी व समर्थ ।
१--वाभि-दयालू, युद्ध में डरपोक, शास्त्र में प्रवीण, धमं में वृत्ति, निरन्तर
उदार अनेक कला जानने वाळा, थोड़े में संतोप ।
६--गुह्य-वडडा कामी, साधु कर्मो से हीन, गीत और नृत्य में प्रेम, फलाओं को जानने चाला, बड़ा यश वाळा ।