सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें१९२ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड
२--जानु-अनेक देश में अनेक तरह का प्रचार करने वाला, कार्य में उत्साही,
चञ्चल, दुर्बल देह, धूतं, सत्यहीन, दुःखी । 9
३--दाहिना पैर-खेती की क्रिया में कुशळ, थोड़ा कमं करने वाला, शत्रु रहित ।
३--बाँयाँ पैर-सेवा का काम करने वाला, अल्पात्रु, निर्धन ।
योग २७--मतांतर-कोई जानु में ६ नक्षत्र और पैर में केवल २ ही नक्षत्र लेते
हैं । परन्तु बहुमत उपरोक्त ही है।
` » जन्म नक्षत्र अनुसार आयु विचार--
३--नक्षत्र मस्तक में-आयु१०० वर्ष । ३-नक्षत्र मुख में-आयु ८० वर्ष । २-नक्ष त्र
कंधों में-आयु ७७ वर्ष, २-नक्षत्र दोनों भु जा, २-नक्षत्र दोनों हाथ-५ नत्रक्ष हृदय में
आयु ६८ वर्ष । १-नक्षत्र नाभि-आयु ६८ । १-नक्षत्र गुह्य-आयु ६० वर्ण । २-नक्षत्र
दोनों जानु--आयु ८ वर्ष । ६--नक्षत्र दोनों पाँव--आयु ६ वर्ण । स्त्री डिभाख्य चक्र--
यह विशेषकर स्त्रियों के लिए है ।
सूयं जिस नक्षत्र पर हो उससे जन्म नक्षत्र गिनने में जहाँ पड़े उसका फल ।
नक्षत्र अंग फल
३“ मस्तक- संताप
७-- मुख “ मिष्ठान्न देने वाला
८-- स्तन ---काम का देने वाला
३-- हृदय --पति को सुख देवे ०
३--- गुह्य --कोमता सदा ही पूर्ण करे
चन्द्र कालानल चक्र
१६ १२ १४ यह गोलाकार भी बनाया जाता है । इस चक्र में सबसे ऊपर जहाँ १ लिखा है यहाँ गोचर के अनुसार वर्तमान दिन नक्षत्र अर्थात् चन्द्र नक्षत्र 'लिखे वहाँ से यहाँ बताये