भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

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पृष्ठ 204

१९४ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड

क का पुरुषाकार चक्र *

वा नक्षत्र पर शुक्र हो उससे जन्मनक्षत्र तक गिनने से जो संख्या आये उसका

फल । ४ नक्षत्र सिर में-राज्य । ५ नक्षत्र कंठ में-धन छाभ। ५ नक्षत्र हृदय में-सुख ।

३ नक्षत्र गुदा में-शत्रुभय । ५ नक्षत्र जांघ में--मिष्ट भोजन । ३ नक्षत्र दाहिने पाँव

में-सुख । २ नक्षत्र वायां पाँव में-सुख ।

६--राहु का पुरुषाकार चक्र

जिस नक्षत्र पर राहु गोचर में हो उससे गिंनने पर जन्म नक्षत्र जहाँ पड़े उसका

फल । ७ नक्षत्र पांव में-धन हानि । ५ नक्षत्र दाहिनी भुजा में-संताप । ३ नक्षत्र सिर

में-शत्रभय । २ नक्षत्र हृदय में-दुजेन से स्नेह । १ नक्षत्र मुख में-दुजन संहार ।

५ नक्षत्र बायाँ हाथ में मृत्यु । १ नक्षत्र नाभि में-सवेनाश । २ नक्षत्र गुदा में--

प्राणनाश । ७--केतु पुरुषाकार चक्र है.

गोचर में केतु जिस नक्षत्र में हो वहां से शिनने पर जन्म नक्षत्र जहां पड़े उसका

फल | ४ नक्षत्र सिर में-जय । २ नक्षत्र मुख में>भय । ५ नक्षत्र कान में-भय ।

२ नक्षत्र हृदय में-शोक । ४ नक्षत्र हाथ-सुख । ५ नक्षत्र पांव में सुख । ४ नक्षत्र वस्ति

में भ्रम, दुःख विकार ।

स--शनि पुरुषाकार चक्र न

जिस नक्षत्र पर शनि हो उससे गिनने पर जन्म नक्षत्र जहाँ पड़े उसका फल-जेसे

श्रवण पर शनि है जन्म शतभिषा नक्षत्र का है तीसरा हुआ दक्षिण भुजा पर आया

फल जय है-१ नक्षत्र मुख में-हानि । ४ नक्षत्र दक्षिण भुज-जय । ६ नक्षत्र चरण में

भ्रम । ५ नक्षत्र हृदय में-श्रीप्राप्ति । ४ नक्षत्र वामकर में-भ य । ३ नक्षत्र शीर्ष में-

राज्य । २ नक्षत्र नेत्र मे-सोख्य । २ नक्षत्र गुह्य में-मृत्यु भय ।

जन्म नक्षत्र से शनि नक्षत्र तक गिनने में जो आवे उसका फल--१ नक्षत्र सिर

में-फल रोग । ३ नक्षत्र मुख में-छाभ । २ नक्षत्र गुह्य में-हानि । २ नक्षत्र नेत्र में--

रूाभ। ५ नक्षत्र हृदय में-सोख्य । ४ नक्षत्र वाम हस्त में-वंधन । ३ नक्षत्र वाम पद में

दुःख, पीड़ा । ३ नक्षत्र दक्षिणपद में-इष्ट यात्रा । ४ नक्षत्र दक्षिण हस्त-अथे लाभ!

चक्रो शनि का पुरुषाकार चक्र -

यदि शनि वक्री हो तो शनि जहाँ हो वहाँ से जन्म नक्षत्र तक गिनके यहां विरुद्ध

क्रम से गिनने से जो आये उत समय फन्न जानना-१ नक्षत्र सिर में-अति पीड़ा । ४

नक्षत्र दाहिने हाथ मॅ-लक्ष्मी और यश प्राप्त । ६ नक्षत्र दोनों पैरों में-निष्फलता । ४

नक्षत्र वाम हस्त मे-युद्ध में शरीर में संशय ।५ नक्षत्र पेट मे-द्रव्य । ३ नक्षत्र मस्तक

में-राज्य सौर्य । २ नक्षत्रनेत्र मे-परम सोख्य । २ नक्षत्र गुह्य में-अल् मृत्यु ।

यहाँ पहिले सिर या १ मुख, २ गुह्य, २ नेत्र, ३ मस्तक, ५ पेट, ४ बायांहाय

« ६ दोनों पर, ४ दाहिना हाथ इस प्रकार विरुद्ध क्रम से नक्षत्रों की गिनती कर जन्म

नक्षत्र जहाँ पडे उसका फल जानना ।