भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

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आयुर्दाय विचार : १९९

बाल अरिष्ट अल्पायु आदि के योग आगे दिये हैं अर्थात्‌ बालक की मृत्यु २ प्रकार

से होती है ।

(१) कोई माता पिता के दोष से मरते हैं। (२) कोई पूतना आदि मातु ग्रहों के दोष से मरते हैं।

(३) कोई अरिष्ट योग से मरते हैं। स्थूल रूप से आयु का अनुमान

(१) राशि धुवांक के अनुसार अ ८ कुंडली में जहाँ-जहाँ जिन-जिन राशियों में ग्रह हों केवल उन राशियों के ध्ुवांक

को जोड़ना तो आयु प्राप्त होगी ।

राशि मेष वृष मिथुन ककं सिंह कन्या तुला वृश्चिक धन मकर. कुम्भ मीन

शुवांक १० ६ २० ५ ८ २ २० ६ १२१४ है ४

सग्रह राशि ३ ५ ८ ९ १० ११ १२ योग र ध्रुवांक २० ८ ६१० १४ ३ ४ =६५ वष

कुण्डली में जिन-जिन राशियों में ग्रह ee 92.

हैं उनके श्रुवांक जोड़ने से स्थूळ रूप से 2 >> >

६५ वर्ष की आयु आई ।

(२) केन्द्रायु योग

कुण्डली के केन्द्र स्थानों में जो अंक

राशियों के हों उन सबका योग कर तिगुना

करना । यदि केन्द्र में राहु या शनि हो तो

उन दोनों की राशि के अंकों को जोड़ कर

तिगुना करना उसे पूर्व प्राप्त गुणन फल में से घटा देना तो स्थूल रूप से आयु प्रगट

होगी । इसमें राहु और शनि दोनों केन्द्र में हों तो दोनों के अंक घटाना यदि केवल

एक ही हो तो एक का घटाना ।

उपरोक्त कुंडली में केन्द्र में ३, ६, ९, १२ राशियाँ हैं जिनका योग ३० हुआ >

३८९० आया । केन्द्र में केवल राहु लग्न में है ३ राशि है ३ > ३-९ आया इसे ९०

में से घटा दिया तो ९०-९-८१ वर्षे की आयु स्थूल रूप से आई ।

इसमें भी बताया गया है कि केन्द्र में जो ग्रह हों उनका भी विचार करना कि वे

उच्च या नीच में हैं शत्रु या मित्र गृही हैं उन पर शुभ या पाप दृष्टि है इत्यादि बातों

को भी विचारना चाहिए । जिससे आयु गणना में अन्तर आ जाएगा ।

अन्यमत-केन्द्र के अंकों की संख्या के योग को तिगुना कर उसमें से राहु और

मंगल की संख्या घटा देने से स्थूल आयु प्रगट होती है ।

नराकार चक द्वारा स्थूल आयु विचार ॥

एक नराकार चक्र बनाकर सिर पर हस्त नक्षत्र रखना आगे क्रमानुसार सर्वे

५ शः