भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

पृष्ठ 210, कुल 454 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 210

२०० : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड

जक्षात्रों की स्थापना नीचे बताये अनुसार करे! जिस भाग में जन्म नक्षत्र पड़े उसके

अनुसार फल विचारना । फल आयु वर्ष

सिर में-हस्त, चित्रा, स्वाती राजा या अधिकारी हो १००

मुख में-विशाखा, अनुराधां, ज्येष्ठा दान प्रिय, घनी द०

गदेन में-मूल, पूर्वाषाढ़ा भोग प्रिय ७०

कंधा में-उत्तराषाढ़ा, श्रवण रंज हो ६०

हाथ में-घनिष्ठा, शतभिषा अशुद्ध आचरण ३०

हृदय में-पूर्व भाद्रपद, उत्तर भाद्रपद बहुत ही धनी 53.93.

रेवती, अश्विनी भरणी

पेट में-कृतिका साधारण धन हो ५०

लिग में-रोहिणी परस्त्री से व्यभिचार 007

घटना में-मृगशिर, आर्द्रा, पुनवंसु लड़ाई झगडा प्रिय २०

पुष्य, आश्लेषा, मघा

पैर में-पूर्वा फाल्गुनी, उत्तराफाल्गुनी अल्प जीवन १० वर्षे या १० मास

जैसे किसी का जन्म अश्विनी में हुआ तो यह नक्षत्र हृदय में पड़ता है । बहुत

घन होगा । आयु ९० वर्ष की होगी ।

केवल इसी चक्र से विचारने से कुछ नहीं होता और प्रकार से भी विचार करना

चाहिये । क्योंकि यहाँ तो अग की राशि निश्चित कर दी गईं | इससे अनेक भिन्न￾भिन्न रीतियों से भी विचारना ।

आयु जानने के ल्यि ग्रहों के योग और दशा जानना आवश्यक है ।

साधारण प्रकार से आयु भेद

(१) अल्पायु ३२ वर्ण तक (२) मध्यायु ७० वर्ण तक

(३) दीर्घायु ७० वर्ण के ऊपर (४) उत्तमायु १०० वर्ण के ऊपर

१ साधारण प्रकार से आयु का ज्ञान

(१) जन्म लग्नेश सूर्थ का शत्रु हो तो--अल्पायु ।

(२) जन्म लग्नेश सूर्य का सम हो तो--मध्यायु ।

(३) जन्म लग्नेश सूर्य का मित्र हो तो--दीर्घायु ।

(१) सूर्य के मित्र ग्रह चंद्र मंगल गुरु हैं लग्न ४, १, ८, ९, १२, होता-दीर्घायु

(२) सूर्य के शत्रु ग्रह शुक्र शनि हैं। लग्न २, ७, १०, ११ हो--अल्पायु । कै

(३) सूर्य म के ग्रह बुध है । लग्न ३, ६ होना--मध्यायु।

२ चर स्थिर 'के अनुसार भी आयु का विचार होता है।

आयु विचारने को ३ जोडियो का विचार करना ।

आयु प्रकार-दीर्घायु मध्यायु अल्पायु

चरमचर चर+स्थिर चर+ट्विस्वभाव

स्थिर+द्विस्वभाव स्थिर{चर स्थिर+स्थिर