सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंआयुर्दाय विचार : २०१
दिस्व्थावनस्थिर दिस्वभाव+द्विस्वसाव द्विस्वमाव+चर
पहिले लग्नेश और अष्टमेश से इस प्रकार विचारना
दीर्घायु मध्यायु अल्पायु लग्नेश चर स्थिर द्विस्वभाव | चर स्थिर द्विस्वमाव [चर स्थिर द्विस्वभाव
अष्टमेश चर द्विस्वभाव स्थिर | स्थिर चर द्विस्वभाव | द्विस्व० स्थिर चर
अर्थात् लग्नेश और अष्टमेश दोनों चर हों या एक स्थिर दूसरा हिस्वभाव में हों
तो दीर्घायु होगी । यदि लग्नेश और अष्टमेश एक चर दूसरा स्थिर में या दोनों द्विस्वभाव में हों तो मध्यायु । यदि एक चर दूसरा द्विस्वभाव में हों या दोनों स्थिर हों तो
अल्पायु होगा ।
(३) इसी प्रकार शनि चन्द्र की जोड़ी या लग्न चंद्र की जोड़ी से विचार . करना
जसा कि लग्नेश और अष्टमेश से विचार किया था । एवं जन्म लग्न और होरा लग्न
'पर से शी विचार करना ।
(१) तीनों प्रकार से एक ही आयु आवे वही आयु ग्रहण करना ।
(२) जहाँ २ प्रकार से एक सी हो एक प्रकार से भिन्न हो तो २ प्रकार से अर्थात्
बहुमत से जो आयु आवे उसे लेना ।
(३) पूर्वोक्त तीनों प्रकार से भिन्न २ आयु आवे तो लग्न और होरा लग्न से जो
आयु आवे उसे लेना ।
(४) यदि लग्न या सप्तम में चन्द्र हो तो चन्द्रमा और लग्न पर से द्वितीय प्रकोर
की आयु लेना ।
(५) यदि उक्त स्थान से भिन्न स्थान में चन्द्र वैठा हो तो शनि और चन्द्रमा से
आयु का विचार करना ।
यहाँ ३ प्रकार से चर आदि द्वारा विचार करने से ३ भेद हो जाते हैं ।
आयु भेद र प्रकारसे रप्रकारसे १ प्रकार से
दीर्घायु १२० वर्ष १०३ ९६
मध्यायू ८० ६२ ६४
अल्पायु ३२ ३६ ¥o
खण्ड ¥o ३६ ३२
यहाँ होरा लग्न की आवश्यकता पडती है इसलिए होरा लग्न निकालने की रीति
देते हैं--
होरा लग्न निक।लना
इष्ट के पल बनाकर ५ का साग देना ऊब्धि अंश पलादि में प्राप्त होगा । अंश
की राशि वना लो ।
जन्म लग्न विषम हो तो=उपरोक्त फल-- जन्म का सूर्य = होरा लग्न
¬ » सम „» = „ जन्म लग्न ८ होरा लग्न
च प० वि० रा० DA)