भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

पृष्ठ 212, कुल 454 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 212

२०२ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड

उदाहरण-इष्ट ३७.३८-३७, लर्न ५-१४-१४४३ कन्या = सम

पल वि० ० छ र"

इष्ट पल २२५८-३७ -+ ५ = लब्धि ४५१ - ४३ ¬= २४ = लग्न सम होनेसे | =राशि-० लब्धि में लग्न जोड ? १५-१-४३- २४

J = ३-१-४३२४

+न ५ - १४-१४ - ४३ रा ४ » =होरा लग्न ८ - १९-५८ - ७

होरा लग्न = ८-१५-५८-७

लब्धि ४५१ -+ ३० अंश की रा० राशि बनाये १५-१ हुआ १२ राशि से

अधिक होने से १२ घटाकर लिया ३ राशि १ अंश रहा ।

यहाँ पर आदि के विचार से (१) लग्नेश, अष्टमेश, (२) शनि, चन्द्र और (३)

जन्म लग्न और होरा लग्न से तोक्न प्रकार से विचारना बताया है और कितने प्रकार

से एक सा आने पर क्या आयु आती है उसका विचार भी दिया है!

इसको आधार लेकर कुछ गणित कर आयु स्पष्ट करने की विधि भी है जो यहाँ

देते हैं ।

आयु स्पष्ट करना

यहाँ उपरोक्त ३ जोडियाँ दी हैं इनमें ६ योग कारक हुए तीनों प्रकार से विचारने

में जिससे अधिकता आवे वे योग कारक हुए यदि तीनों से भिन्न आवे तो जन्म लग्न

और होरा लग्न से प्राप्त आयु लेना यहाँ जन्म लग्न और होरा लग्न ही कारक होंगे ।

योग कारक के स्पष्ट में राशि को छोड़कर केवल अंश कला विदःला लेना । फिर

सबका योग करना जितने योग कारक हो उस योग में उतने का भाग देना अर्थात्‌ ४

योग कारक हों तो ४ का, २ योग कारक हो तो, २ का भाग देना । पश्चात्‌ उसमें उस

खण्ड का गुणा करना । ३ प्रकार से मिला हो तो प्रथम खंड ४० का, दो प्रकार से

मिलने पर द्वितीय खण्ड ३६ का, और एक प्रकार से मिलने पर तीसरा खंड ३२ का

गुणा करना । पश्चात्‌ ३० का भाग देने से वर्ण मास घड़ी पल आवेंगे वह गत आयु. हुई इसे खण्ड की प्राप्त आयु में घटा देना तो स्पप्ट आयु होगी 1

यहाँ ३० का भाग देने की क्रिया कुछ क्लिष्ट है इससे गुणनफल में १२ मास का गुणा करना । जो अँश आवे उसमें ३० का भाग देना तो लब्धि मास होंगे शेष दिन होंगे आगे कळा विकला को घड़ी पल जानो । उदाहरण से समझ में आ जायगा ।