सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंआयुर्दाय विचार : २०५
पाप ग्रहों के मध्य में हो या उससे त्रिकोण स्थान पाय ग्रह से युक्त हों तो कक्षा हास
होता है ।
३--पाप ग्रह होकर कारक नीच स्थान में या उच्च नीच स्थान से भिन्न स्थान
में होकर पाप ग्रह युक्त हो तो भी कक्षा हास होगा ।
४-- इसके विपरीत होने पर कक्षा वृद्धि होती है अर्थात् लग्न और उससे सप्तम
तथा कारक ओर उससे सप्तम शुभ ग्रहों के मध्यवर्ती हों या उससे त्रिकोण स्थान शुभ
ग्रह से युक्त हो, या शुभ ग्रह कारक होकर उच्च में या उच्च नीच से इतर स्थान में
होकर शुभ ग्रह से युक्त हो तो कक्षा वृद्धि होती है ।
५--इसी प्रकार गुरु से भी कक्षा वृद्धि का विचार करना । जसे गुरु पाप ग्रह के
मध्य हो या उससे त्रिकोण स्थान पाप ग्रह से युक्त हो तो कक्षा हास होता है।
६--शुभ ग्रह् के मध्य में हो या उसके त्रिकोण स्थान में शुभ ग्रह हो या उच्च
स्थान में हो या उच्च नीच से भिन्न स्थान में स्थित होकर शुभ ग्रह से युक्त हो तो
कक्षा वृद्धि होती है ।
७-_पूर्वं बताये कक्षा योग में पूर्व चन्द्र और शुक्र का योग हो तो वहाँ पर दशा
में एक राशि की वृद्धि होती है किन्तु कक्षा वृद्धि नहीं होती ।
८-_पूर्वोकत कक्षा ह्लास योग में शनि का योग हो तो दशा में एक राशि का
ह्रास होता है ।
(४) आयु विचारने को नीचे बताई तीन जोडियो पर भी विचार करो
(१) चन्द्र की ओर लग्न की द्रेष्काण की राशियाँ ।
(२) लग्नेश और चन्द्र राशिं पर की नवांश राशि।
(३) लग्नेश और अष्टमेश की द्वादशांश राशि ।
ऊपर बताई चर स्थिर आदि के अनुसार दीघं मध्य अल्पायु का विचार करना ।
(५) शुभ ग्रह और लग्नेश की केन्द्र आदि स्थिति के अनुसार
(१) शुभ ग्रह और लग्नेश केन्द्र में हो--दीर्घायु
(२) ४ ४7 र ¬ पणफर में हो-मध्यायु
(३ ) sn 7 i Fe आपोक्लिम में हो---अल्पायु
यहाँ लग्नेश अष्टमेश में जो वली हो उससे विचारना
अष्टमेश और पाप ग्रह इसी प्रकार हों तो इससे विरुद्ध फल जानो ।
(६) नीचे बताई जोड़ियों में मैत्री निकालो
१. चन्द्र राशि का स्वामी और चन्द्र से अष्टम राशि का स्वामी ।
२. लग्न से लग्नेश अष्टमेश । ३. लग्नेश और सूर्य
ये मित्र हों तो-दीघं आयु । ये सम हों तो-मध्यायु । ये शत्रु हों तो-अल्पायु ।
(७)लग्नेश या लग्न नवांशेश वली हो और उस स्थान से गिनने पर-- १
१. अच्छे स्थान में हों या अष्टमेश से गिनने पर अच्छे स्थान में हो जैसी स्थिति
हो तो जातक दीघंजीवी होगा ।