भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

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२०६ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड

चन्द्र राशि का स्वामी या चन्द्र का नवांशेश के सम्बन्ध से भी उपरोक्त फल

होगा । यदि ऐसा न हो तो विरुद्ध फल होगा । न

२. लग्नेश की अपेक्षा अष्टमेश अति बली हो केन्द्र में हो और यदि पाप ग्रह

अष्टम और द्वादश भाव में हों तो अल्पायु होगी ।

३, लग्न से अष्टम स्थान का स्वामी और सप्तम स्थान से अष्टम स्थान का स्वामी

इन दोनों में जो वळी हो वह केन्द्र में हो तो दीर्घायु । पणफर में हो तो मध्यायु ।

आपोक्लिम में हो तो अल्पायु होगी ।

४. इसी प्रकार आत्म कारक का स्वामी और उससे सप्तम स्थान से अष्टम स्थान

का स्वामी इन दोनों में जो बली हो वह आत्म कारक से केन्द्र में होतो दीर्घायु, पणफर

सें मध्याय, आपोक्लिम में अल्पायु होगी । लग्न विषम हो तो क्रम से, सम हो तो

उत्क्रम से ( उल्टी गिनती से ) अष्टमेश जानना ।

यदि लग्न तृतीय में कारक हो तो केन्द्र आदि में स्थित अष्टमेश के वश विपरीत

आयुर्दाय जानना । जैसे केन्द्र में अष्टमेश हो तो अल्पायु, पणफर में मध्यायु, आपोक्लिम

में दीर्घायु होती है।

(८) लग्नेश अष्टमेश आदि का चर स्थिर आदि के अनुसार ऊपर दीर्घ मध्य अल्प

आयु का निर्णय बताया है । इसीप्रकार यहाँ धर्मादि स्थान स्थिति के वश दीर्घादि आयु

का निर्णय करना ।

(१) एक पंचम में दूसरा लाभ में -दीर्घायु।

(२) एक तृतीय में दूसरा लाभ में-मध्यायु ।

(३) एक नवम में दूसरा लाभ में--अल्पायु ।

(४) दोनों लाभ में--हीनायु ।

इसी प्रकार लग्न होरा लग्नआदि के वश आयु विचारना ।

आयु दीर्घायु मध्यायु अल्पायु हीनायु

लग्नेश ११ भाव में ११ में ११ में ११ में

अष्टमेश में ३ में ९ में ११ में

(९) अष्टमेश आदि योग कारक ग्रह र

१. लग्न से त्रिकोण ( १-५-९ ) में होने से ३ प्रकार को अल्पायु होती है । २.

लग्नेश से त्रिकोण में होने से ३ प्रकार की अल्पायु और ३. लग्नेश आश्रित राशि से ३

प्रकार की दीर्घायु होती हे प्रत्येक का प्रमाण १२ वर्ष का होता है जैसा यहाँ दिया है- रग्न से लग्नेश से लग्नेश आश्रित राशिसे

त्रिकोण १ ५ ९ 24 “९ १ 4 ९ आयु १२ २४ ३६ उडद ६० ७२ ८४ ९६ १०८ वर्ण अल्पायु मध्यायु दीर्घायु जैसे लग्न से अष्टमेश आदि कोई योग कारक ग्रद्द लग्न में न हो तो अल्पाय १२ वर्ष की, पंचम में हो तो १४ वर्ण की, नवम में हो तो ३५ वर्ण की होगी । बह जगे से