सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 215, कुल 454 में से
संदर्भ में पढ़ेंउदाहरण
लग्नेश |भष्टमेश | शनि ॥ लग्न |होरा लग्न
बुध द मंगल मिष कन्या धरन
मकर में मिष
चर [चर चर [चर द्वि ०ट्विस्वभाव
“अ
दीर्घायु | दीर्घायु | मध्यायु
- बी : यहाँ २ प्रकार से दीर्घायु आई १०८ वर्ण | दो प्रकार से आने का गुणक ३६
है। यहाँ योग कारक लग्नेश, अष्टमेश शनि
आयुर्दाय विचार ; २०३
और चन्द्र ४ हैं । इनका योग कर ४ का भाग देना होगा । ता.“ लग्नेश बुध स्पष्ट ९-२१-२७-३१
अष्टमेश मंगल ,, ०-१९-. ८-२२
शनि
२१-२७-३१ यहाँ इनकी राशि
१९- ८-२२ छोड़कर केवल
४. ०¬२५-१३-३१ २५- १- १ अंशादि ल्या है
चन्द्र ॥ ६०२५-५९-२७ २८-५९-२७ रीति पहली योग ९४-३८-९८ = ४ २२-३९-४२ % ३६ = २२-३६-४२ ( रीति दूसरी ) = ५५१९-४९-१२ गुणन फल यहाँ गुण नफल ८५१:४९-१२ में i २८१२ यदि ३० का भाग देना है तो :---
१०२२१-५०-२४ ३०)८५१-४९-१२(२८ वर्ण
मास मास ६०
३०)१०२२१०(३४० १२)३४०(२ वर्ण 00
0 ४ पपन मम
7 > ११-४९-१२ १२२ १०० >१२
ER १४१-५०-२४ २१ दिन ४ मास ३०)१४१-५०-२४(४ माह = वर्ण - मास - दिन - घ० - पल
२८-४ - २१ - ५० - २४गतायु
इस प्रकार से पूर्णायु १०८ वर्ष आती है
व० मा० दि० घ० प०
पूर्णायु १०८-०-०-०-०
गतायु २८ - ४ -२१- ५०-२४
शेष आयु ७३ - ७ - ८- ९ -३६
आयु वर्ण माह दि० घ० प० आदि
७९- ७-० ८- ९ - ३६
१२०
२१-५०-२४ SRG
३०)६५५-१२-०(२१