सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 216, कुल 454 में से
संदर्भ में पढ़ें२०४ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड
वर्ष मास दिन घण्टा पल
= २८ ४ २१ १० २४
` इस प्रकार ३० का भाग देने में असुविधा
होती है इससे पहिली बताई रीति सरल है
यदि तीनों भिन्न २ प्रकार से आयु आवे, तो लग्न और होरा लग्न से आई आयु .
लेनी पड़ेगी । एक प्रकार से आने का तीसरा गुणक ३२ का गुणा कर ३० का उपरोक्त
प्रकार से भाग देने पर गतायु प्राप्त होगी । एक प्रकार से जो आयु आवे उससे घटा
देने से स्पष्ट आयु प्राप्त होगी । यदि रन्न और होरा लग्न से दीर्घायु आवें तो ९६ वर्ष
लेना मध्यायु आवे तो ६५ वर्ण, अल्पायु आवे तो ४० वर्ण लेकर उसमें से गतायु घटा
देना तव स्पष्ट आयु प्राप्त होगी ।
परन्तु उपरोक्त प्रकार से प्राप्त आयु में भी घट बड़ होती है जिसे कक्षाह्मास या
कक्षा में वृद्धि कहते हैं, जिसका नियम आगे दिया है :--
पूर्ण प्राप्त आयु में कक्षा ह्वास-वृद्धि करने के नियम
(१) कक्षा हास---
यदि शति योग कारक हो तो कक्षा ह्लास होता है अथात् दीर्घायु हो तो उसे मध्यायु
मध्यायु हो तो अल्पायु जानो यदि अल्पायु हो तो उससे भी अल्पहीनायु जानना ।
जंमिनी सूत्र में आयुर्दाय के सम्बन्ध में ३२-३६-४० ये तीन कक्षाये हैं । नियमा-
नुसार ४० की प्रप्ति हो तो ३६, ३६ की प्राप्तिःहो तो ३२ समझो, यदि ३२ की
प्राप्ति हो तो शनि जिस राशि में बैठा हो उस राशि की दशा का आधा ३२ से घटकर जो शेष वचे वह उसकी अल्पायु हुई ।
इससे द्विगुण मध्यायु ओर त्रिगुणित दीर्घायु मानकर पुंवत् स्पष्ट आयु के मान
का अनुमान करना ।
शनि अपनी राशि या उच्च में हो तो कक्षा ह्लास नहीं होता ।
(२) कक्षा वृद्धि यदि लग्न या सप्तम में गुरु हो तो कक्षा वृद्धि होती है अर्थात् अल्पायु आवे तो
मध्यायु समझो, मध्यायु में दीर्घायु और दीर्घायु में उससे भी अधिक दीघंआयु होती है ।
अर्थात् ३२-३६-४० इन तीनों कक्षाओं में ३२ की प्राप्ति हो तो ३६ लेना, ३६
की प्राप्ति में ४० ओर ४० की प्राप्ति हो तो गुरु जिस राशि में बैठा हो उस राशि को
चार दशा का आधा ४० में जोड़कर उसके तुल्य लेना । अल्पायु से द्विगुणित मध्यायु
और त्रिगुणित दीर्घायु मानकर आयु स्पष्ट साधन करना ।
(३) कक्षा ह्लास वृद्धि के नियम
१--लग्न और सप्तम पाप ग्रह के मध्यवर्ती हो या उसके त्रिकोण (५-९ स्थान)
पाप ग्रह से युक्त हो तो कक्षा ह्लास होता है ।
२--इसी प्रकार अन्य कारक से भी विचारना जैसे कारक और उसके सप्तम