सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंग्रहों की दृष्टि का फल : १३
(७) शनि स्थानी (१०-११ राशि के) मंगल पर दृष्टि
सूर्य की--स्त्री-पुत्र, धन के सुखयुक्त, तरुण स्वरूप, तीक्ष्ण, निरन्तर बड़ा शूरवीर
चन्द्र की--श्रेष्ठ आभूषण युक्त, माता के सुख से हीन, स्थान भ्रष्ट, चंचळ
मित्रता, उदार चित्त ।
वुध की--प्रिय वाणी, भ्रमण करने में धन प्राप्त,यत्नयुक्त, जुआ से युक्त निर्भय ।
गुरु कौ--बड़ी आयु, राज कृपा युक्त, गुण युक्त, भाइयों को प्यारा, सुन्दर देहू की कांति, कार्य में बहुत बोलने वाला ।
शुक्र की--श्रेष्ठ भोग, सौभाग्य, सुख युवत, स्त्रियों का प्यारा, कलह प्रिया
शनि की- राजा के धन को प्राप्त करने वाला, स्त्री के साथ वेर, बहुश्रुत, बड़ी
बुद्धि वाला, कपट युक्त, संग्राम प्रिय ।
मङ्गल पर पाप ग्रह की दृष्टि--क्षेत्र, धन-धान्य आदि का नाश ।
मङ्गल पर शत्रु ग्रह की दृष्टि--बन्धन, रोग, युद्ध तथा दुर देश में निवास ।
मङ्गल पर शुभ ग्रह की दृष्टि--विजय, देश और क्षेत्र का लाभ तथा मित्रो से
शुभ ।
मङ्गल पर मित्र ग्रह की दृष्टि- धन की वृद्धि हो ।
४--बुध पर दृष्टि का फल
(१) मंगल स्थानी (१-८ राशि के) बुघ पर दृष्ट
सूर्य की दृष्टि-- भाइयों का प्यारा, सत्यवक्ता, विलासयुक्त, राजा, श्रेष्ठ गौरव
युक्त ।
` चन्द्रकी दृष्टि--श्रेष्ठ, गीत नृत्यादि में प्रीत, काम सहित, स्त्री में प्रीत, वाहन
और नौकरयुक्त, चुगल ।
मंगल की दृष्टि---राजा का प्यारा, बहुत धन वाला, शूरवीर, चतुर, लड़ाई में
उद्यत, क्षुधायुक्त ।
गुरु की दुष्टि-सुखयुवत, चतुर श्रेष्ठ वाणी, स्त्री पुत्रादियुक्त, प्रसन्न चित्त ।
शुक्र की दृष्टिस्त्रियों के साथ विलासी, गुण और गोरवयुक्त, स्त्रियों का प्यारा
सुन्दर बुद्धि, नम्रता सहित ।
शनि की दृष्टि- श्रेष्ठ साहस वाला, कूर स्वभाव, कुल में कलटयुक्त, प्रीत और
श्रेष्ठ वृत्ति से रहित ।
(२) शुक्र स्थानी (२-७ राशि) बुध पर दृष्टि
सूर्य की दृष्टि--दरिद्र और दुःख तथा रोगों से सन्तापित देह वाला, पराया
उपकार करने में निरन्तर तत्पर, शान्त स्वभाव, शुद्ध चित्त ।
चंद्र की-हुत प्रपंची, धनधान्ययुक्त, दृढ़ प्रतिज्ञा, राजा का मंत्री प्रख्यात ।
मंगल की--राजा से अपमानित, रोग से सन्तापित, मित्र और विषयों से रहित ।