भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

पृष्ठ 222, कुल 454 में से

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२१४ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड

चिरायु ५०--अष्टमेश अष्टम में लग्नेश लग्न में हो ( जा० पारि० )1 ८१--लग्न से द्वादशेश अपनी राशि में बलवान्‌ हो तो चिरायु और सुखी हो

( जा० पारि० )।

» ८२--हग्तेश, अष्टमेश केन्द्र में बलवान्‌ हो ( जा० पा० )। आय॒ष्मान्‌ निरोग ८३-गर्भाधान की लग्न राशि के अष्टम घर में दशवीं राशि हो या

र जन्म लग्न, बुध गुरु शुक्र से युक्त या दृष्ट हो तो आयुष्मान्‌ और निरोग

रहे ( जा० पा०)।

दीर्घायु ८४--अष्टमेश मित्र गृही हो तो दीर्घायु ।

१, ८५-अष्टमेश्ष शनि युक्त हो।

„ ८६--चन्द्र की दृष्टि सूर्य पर और बुध की दृष्टि चन्द्र पर हो तो सुखी और

चिरायु हो ।

„ ८७--लग्त सूर्य चन्द्र बली होकर शुभ ग्रह युक्त हों ।

9 ५८५८-गुर शुक्र केन्द्र में चन्द्रमा लाभ में हो ।

मध्यायु ( ३२ वर्ष से ७० वर्ष तक आयु ) योग

मध्यायु १--लग्नेश निर्बल हो, गुरु केन्द्र या त्रिकोण में हो, पाप ग्रह ६, ८, १२

भाव में हो ( जेमिनी० ) ।

१, २--ैन्द्र त्रिकोण में शुभ ग्रह हो, पाप ग्रह ६, ८ में हो शनि बली हो या

लग्न केन्द्र या त्रिकोण में पाप ग्रह हो ( जैमिनी० ) ।

श कन्न से ओर कारक से बलवान्‌ अष्टमेश कारक ही हो तो अल्पायु दीर्घायु

होते हुए भी मध्यायु होती है ( जैमिनी ) ।

» टॅ--पाप ग्रह २, ३,४, ५, ८, ११ इन स्थानों में हो तो मध्याथु (प्राण्यो०) । ० ५ ऊग्नेश साधारण प्रकार से सूर्य के साथ हो तो मध्यायु ( स० चि ) । # रै जानि बलवान्‌ हो शुभ ग्रह केन्द्र या त्रिकोण में हो पाप ग्रह ५ या ८ घर में हो ( सवं चि० ) । पाप युक्त होने पर भी बल के अनुसार कुछ अन्तर

पड़ जायगा जैसे मंगल शनि युक्त मकर में हो या शनि लग्नेश शुक्र के

साथ तुला में हो तो उसकी अशुभता अवश्य कम हो जायेगी । जब लग्नेश शक्ति हीन हो गुरु केन्द्रमें हो या त्रिकोण में हो और पाप ग्रह दुष्ट स्थान में होने से मध्यायु हो जाती है यहाँ अच्छे बुरे का मिश्रण है। बलहीन लग्नेश अल्पायु देता है । गुरु केन्द्र त्रिकोण में दीर्घायु देता है और पाप अह दुष्ट स्थान में मिश्रित फल देते हैं । पाप ग्रह ६ भाव में दीर्घायु देते हैं परन्तु ८ या १२ घर में हों तो आयु घटा देते हैं । » ७-जीवन का कारक शनि है वह बलहीन केन्द्र या त्रिकोण में हो ओर शुभ युक्त हो पाप ग्रह ६ या ८ ग्रह में हो तो मृध्यायु । पापग्रह लग्न केन्द्र या त्रिकोण में मध्य जीवन देते हैं परन्तु तुला लग्न में शनि हो तो उसकी पुर्णायु होगी ( स० चिन्ता? ) ।

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