सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 223, कुल 454 में से
संदर्भ में पढ़ेंआयुर्दाय विचार : २११
दीर्घायु २९--अपने ही स्थान में स्थित ग्रह बुध और शनि हो ( छ० चं० ) । दीर्घायु ३०--सप्तम में शुक्र शुभ राशि का शुभ ग्रहों से दृष्ट व युत हो तो दीर्घायु और भाग्यशाली हो ( जा० सं० ) ।
दीर्घायु जितेन्द्रिय ३१--लग्न से ५, ९, ८, १, ४, ७, १० भाव में से किसी में
३, ४, या ५ ग्रह हों तो स्त्री पा कर भी जितेन्द्रिय तथा दीर्घायु हो । कोई आचार्य
इसे राजयोग कहते हैं । ( स० चिता० ) ।
दीर्घायु सुखी३२--पूर्ण चंद्र या चंद्र
जो शुभ राशि या अंश में हो और बलवान
गुरु से दृष्ट हो तो सव भय दूर कर उसे
दीर्घं जीवन और सुख देगा (स० चि०) ।
दोर्घायु निर्भय वली ३३- जन्म में
सम्पूर्ण ग्रह लग्न को देखते हों तो हास्य
विलास युक्त बलवान् निभंय, शत्रु कुछ ८०5२ च्चः न 04 गुः नाशक, राज कुल में उत्पन्न ओर दीर्घायु Mr न] हो (जा० भ०)।
दीर्घायु, रोग रहित मंत्री आदि ३४--छग्न से ७, ६, ८ घर में शुभ ग्रह हों पाप
ग्रह से युक्त दृष्ट न हों तो वह दीर्घायु, राजा का मंत्री, सेना का स्वामी, भूमि का
स्वामी, बहुत स्त्रियों का पति, रोग रहित, भय हीन, सुन्दरता और भिन्नता युक्त
श्रेष्ठ शील वाला सदा प्रसन्न होता है । ( जा० भ० )
दीर्घायु सुखी धनी ३५--लग्नेश शुभ ग्रह यृक्त, उच्च राशि का केन्द्र त्रिकोण में
शुभ ग्रहों से दृष्ट हो या दशमेश से युक्त हो या, अपनी राशि में हो तो दीर्घायु हो,
उत्तम ऐश्वर्य, उत्तम कीति धन अन्न युक्त हो ( स० चि० ) ।
१०० वर्षे आयु निरोग सुखी ३६--छग्नेश तथा गुरु केन्द्र में हो, केन्द्र त्रिकोण
और अष्टम स्थान में पाप ग्रह न हो तो १०० वर्ष जीवे, पुण्य कर्मी, निरोग और सुखी
होवे ( स० चि० ) ।
युगांत आयु लक्ष्मी युन ३७--शनि के अंशक में सूर्य मंगल गुरु नवम या दशम
घर में हो बलवान् भी हो और लग्न में चंद्र राशि के अन्त्य नवोश का हो तो लक्ष्मी
युत युगांत आयु पावे ( स० चिता० ) ।
२ हजार वषं आयु ३८--नवम स्थान में बुध शुक्र शनि एक ही अंशक में होवें
या एक अंशक ही में छगन मे होवे ६ या ८ मे चंद्र हो तो २ हजार वर्ष की आयु
हो ( स० चिता० ) |
दीर्घायु २९--शुभ ग्रह युक्त लग्नेश लग्न में हो या सप्तम में शुभ ग्रह हो तो
दीर्घाय हो ( शंभु हो० ) । - दीर्घायु सुखी ४०--लग्नेश शुभ ग्रह हो या शुभ ग्रह लग्न में हो तो बड़ी आयु
वाला क्लेश रहित और सुखी हो ( जा० सं० )।
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