सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 227, कुल 454 में से
संदर्भ में पढ़ेंआयुर्दाय विचार : २१५
मध्यायु ८--लग्नेश अष्टमेश और दशमेश इनमें २ बली हों शनि का योगन हो तो
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मध्यायु ( जा० परि० )
९---मुरु केन्द्र त्रिकोण में हो और वह बलहीन लग्नेश के साथ हो ।
१०-छग्न से तीसरे और छठे घर का स्वामी केन्द्र में हो ।
११--गुर या शुक्र केन्द्र में हो।
१२--जो पुनवंसु नक्षत्र में उत्पन्न हो वह साधारण प्रकार से मध्यायु होता है ।
जवकि कोई वालारिष्ट या अल्पायू योग न हो ।
१३--जत्र कोई वालारिष्ट अल्पायु योग पूर्ण आयु योग न हो तो मध्यायु योग
समझना ।
अल्पायु योग
अल्पायु १--मेष वृश्चिक राशि का गुरु अष्टम में हो, सूर्य मंगल शनि चन्द्रगा से दृष्ट हो और शुक्र न देखता. हो तो अल्पायु हो (जा० भ० )
२--ग्रुर ओर शुक्र दोनों लग्न में
हों पाप ग्रह पंचम में हो
( जा० छं० ) ।
३-लग्नेश सूर्य युक्त होकर लग्न
में कूर ग्रहों से युक्त या दुष्ट
हो (जा० लं० ) ॥|
४--सातवें घर में मंगळ, आठवें
शुक्र, नवम सूर्य हो (छ. चं)
अल्पायु पर धनी हो ( मान० ) ।
५--वारहवे में चन्द्र,छठे में पापग्रह हो तो अल्पायु और रोगी हो (ल० च०) | ६--पांप ग्रह या लग्नेश से युक्त अष्टमेत्र अष्टम हो ( वृ० पा० ) जैसे अष्टमेश की स्थिति से आयु का विचार होता है उसी प्रकार दशमेश से भी विचारना ( वृ० पा० ) ।
७--पाप ग्रहों के साथ अष्टमेश कहीं हो ओर लग्नेश अष्टम स्थान में हो ( जैमि० ) इसी प्रकार शनि और दशमेश से भी विचारना ( जैमि० )। ८-लग्नेश नीच में हो, अष्टम स्थान पाप ग्रह से युक्त हो, लग्नेश निर्वल हो ( ज॑मि० ) ।
९-लग्न से पंचम स्थान, अष्टमेश ओर अष्टम स्थान पप ग्रह युक्त हो (जैमि०)। १०-अष्टमेश पाप गृही होकर ६-८-१२ भाव में पाप ग्रह युक्त हो (जैमि०) । ११-अष्टमेश पाप ग्रह युक्त ६ या १२ भाव में हो (जैमि०) । १२-अष्टमेश लग्नेश युक्त ६ या वारह भाव में हो और निर्वल हो ।