भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

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आयुर्दाय विचार : २१५

मध्यायु ८--लग्नेश अष्टमेश और दशमेश इनमें २ बली हों शनि का योगन हो तो

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४७

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मध्यायु ( जा० परि० )

९---मुरु केन्द्र त्रिकोण में हो और वह बलहीन लग्नेश के साथ हो ।

१०-छग्न से तीसरे और छठे घर का स्वामी केन्द्र में हो ।

११--गुर या शुक्र केन्द्र में हो।

१२--जो पुनवंसु नक्षत्र में उत्पन्न हो वह साधारण प्रकार से मध्यायु होता है ।

जवकि कोई वालारिष्ट या अल्पायू योग न हो ।

१३--जत्र कोई वालारिष्ट अल्पायु योग पूर्ण आयु योग न हो तो मध्यायु योग

समझना ।

अल्पायु योग

अल्पायु १--मेष वृश्चिक राशि का गुरु अष्टम में हो, सूर्य मंगल शनि चन्द्रगा से दृष्ट हो और शुक्र न देखता. हो तो अल्पायु हो (जा० भ० )

२--ग्रुर ओर शुक्र दोनों लग्न में

हों पाप ग्रह पंचम में हो

( जा० छं० ) ।

३-लग्नेश सूर्य युक्त होकर लग्न

में कूर ग्रहों से युक्त या दुष्ट

हो (जा० लं० ) ॥|

४--सातवें घर में मंगळ, आठवें

शुक्र, नवम सूर्य हो (छ. चं)

अल्पायु पर धनी हो ( मान० ) ।

५--वारहवे में चन्द्र,छठे में पापग्रह हो तो अल्पायु और रोगी हो (ल० च०) | ६--पांप ग्रह या लग्नेश से युक्त अष्टमेत्र अष्टम हो ( वृ० पा० ) जैसे अष्टमेश की स्थिति से आयु का विचार होता है उसी प्रकार दशमेश से भी विचारना ( वृ० पा० ) ।

७--पाप ग्रहों के साथ अष्टमेश कहीं हो ओर लग्नेश अष्टम स्थान में हो ( जैमि० ) इसी प्रकार शनि और दशमेश से भी विचारना ( जैमि० )। ८-लग्नेश नीच में हो, अष्टम स्थान पाप ग्रह से युक्त हो, लग्नेश निर्वल हो ( ज॑मि० ) ।

९-लग्न से पंचम स्थान, अष्टमेश ओर अष्टम स्थान पप ग्रह युक्त हो (जैमि०)। १०-अष्टमेश पाप गृही होकर ६-८-१२ भाव में पाप ग्रह युक्त हो (जैमि०) । ११-अष्टमेश पाप ग्रह युक्त ६ या १२ भाव में हो (जैमि०) । १२-अष्टमेश लग्नेश युक्त ६ या वारह भाव में हो और निर्वल हो ।