भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

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२१६ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड

अल्पायु १३-दशमेश, लग्नेश अष्टमेश केन्द्र त्रिकोण या लाभ में हों तो दीर्घायु योग होता

श्र

है परन्तु उक्त ग्रह शनि के साथ हो तो अल्पायु योग हो जाता है (जैमि०) ।

१४-६-८-१२ भाव भें पाप ग्रह हो लग्नेश निर्वल हो शुभ ग्रह युक्त या दृष्ट न

हा तो अल्पायु और संतान हीन हो ( जा० पारि० ) ।

१५-अष्टमेश या शनि क्रूर षष्ठ्यंश में हो पाप ग्रह युक्त हो ( जा० पारि० )।

१६-पाप ग्रह २-१२ भाव में क्रूर षष्ठ्यंश में हो शुभ दृष्ट न हो (जा.पारि.) ।

१७-लग्नेश नीच राशि नीच नवांशक में हो, पापग्रह छठे आठवें होवें,माँदि लग्न

में हो शुभ दृष्ट न हो तो अल्पायु हो अपने कुछ का नाशक हो (स० चि०) । १८-शनि लग्न मों हो किसी शुभ ग्रह की दृष्टि न हो तो अल्पायु हो और

कुटुम्व का नाशक हो ( स० चि० )।

१९-अष्टमेश नीच में हो अष्टम भाव में पाप ग्रह हो, लग्नेश निर्बल हो (वु? पा० )। २०-तृतीयेश और मंगल ये दोनों या अष्टमेश और शनि ये दोनों अस्त हों या पाप ग्रहों से युक्त या दृष्ट हों ( वृ० पा० ) ।

२१-छम्नेश पाप ग्रह युक्त ६, 5, १२ भाव में हो तो अल्पायु या संतान हीन हो ( वृ० पा० ) । २२-केन्द्र में पाप ग्रह हो उस पर शुभ ग्रह की दृष्टि न हो ओर लग्नेश निर्वल

हो ( वृ० .पा० )।

-२३-२, १२ भाव में पाप ग्रह हो उस पर शुभ ग्रह की दृष्टि न हो

(वृ० पा० ) 1

२४-छग्नेश और अष्टमेश दोनों अस्त नीचादि स्थिति में हों और निर्वल हों ( बूर पा० ) । २५-दशमेश, अष्टमेश, लग्नेश इन तीनों में कोई एक वली हो तो अल्पायु हो (जार पारि० ) । इन तीनों में कोई बली न हो तो गतायु समझो । २६-छग्नेश अष्टम में हो या अष्टमेश पापग्रह युक्त या दृष्ट होकर अस्तंगत या शत्रु गृही हो तो आयु रहित हो ( जा० पारि० ) । २७-अस्तंगत व बलवान्‌ पापग्रहों में दुःखी व अल्पायु जातक व उसको स्त्री हो (शंभु० ) । २८-छग्नेश पापग्रह होकर निवल हो, पाप ग्रह लग्न में हो ( जा० संग्र० ) । २९-नवम में सूर्य चन्द्रमा हो ( शंभु० ) । ३०-छम्नेश सूर्ये का शत्रु हो ( स० चिं० ) ।

३१-अष्टम घर में क्रूर षष्ठ चन्द्र हो और अष्टमेश या शनि पाप युक्त या दुष्ट हो ( स० चिंता० )।

३२-छणनेश बलहीन हो पाप ग्रह दृष्ट स्थान में हो ओर गुरु केन्द्र या त्रिकोण में हो (स० चिं० ) ।