सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 229, कुल 454 में से
संदर्भ में पढ़ेंआयुर्दाय विचार : २१९
१६. केन्द्र में चन्द्र हो और पाप ग्रह एक-एक कर के स्थित हों शुभ ग्रहों की
दृष्टि न हो। न १७. लर्न के उभय पाशवं ( २-१२ भाव में ) ओर सप्तम के उभय पाश्वं ( ६-८
भाव में ) यदि कूर ग्रह हो [ ज्यो शा० ]।
१८. १, ४, ७, ८, १० घर में कूर ग्रह हों, क्षीण चन्द्र लग्न में हो या चन्द्र
४, ७, ८ घर में हो और इसके पाशवं राशियों में क्रूर ग्रह हो [ ज्यो० शा० ]।
१९. क्षीण चन्द्र १, ५, ७, ८, ९. १२, स्थान में कहीं हो शुभ ग्रहों की दृष्टि न
हो, लग्न में चन्द्र, ८ घर में मंगळ, नवम में सूर्य, व्यय भाव में शनि हो और इनमें से किसी पर गुरु की दृष्टि न हो [ ज्यो० शा० ]। बाल मृत्यु
[१] लग्नेश तथा चंद्र २ पाप ग्रहों से युक्त हो [ स० चि० ]। [२] जन्म समय
चंद्रमा पर ग्रहण या परिवेष [ मंडल ] होवे तथा पाप दृष्टि हो | [ ३ ] पाप ग्रह से
दृष्ट मंगल सप्तम या अष्टम स्थान में होवे। [ ४ ] पाप ग्रह ३-६ घर में शुभ ग्रह
१२ वें घर में हो या चंद्रमा पाप युक्त ४-८ भाव में हो | [५] लग्न में सूर्य चंद्र व्यय
स्थान में पाप ग्रह हो शुभ ग्रह की दृष्टि न हो [स० चि० ]। [ ६] ६-८-१२
भाव में चंद्र हो, सूर्य के अतिरिक्त पाप ग्रह भंगल. शनि, राहु केतु से दुष्ट हो तो
लग्न में गुरु के रहने पर भी वालक मर जाता है [ जा०पारि० ] । [७] गण्डान्त
नक्षत्र में चंद्रमा हो पाप ग्रह युक्त या दुष्ट हो मृत्यु भाग में पाप दृष्ट हो । [ जा०
पारि० ]। मृत्यु भाग -मेषादि क्रम में चंद्रमा के अंश इस प्रकार मृत्यु सूचक है।
राशि १ २ ३ ४ ५ ६ ७ ८ ९ १ ११ १२
चंद्र अंश ८ २५ २२ २२ २१ १ ४ २३ १८ २० २४ १० यहाँ अंश मृत्यु सूचक वर्ष भी बताते है जेसे मेष राशि का चंद्र ८° पर हो तो ८
वषं में मृत्यु सूचक है [ जा० पारि० ]।
मतान्तर
नीचे बताये राशि के अंश में जन्म हो तो अशुभ है इनमें जन्मे बालक की
मृत्यु हो जाती है । [जा.भ.]
राशि १ २ ३ ४ ५ ६ ७ ८ ९ १० ११ १२
अंश ८ २९ २३ २२ ५ १ ४ २३ १८ २० २१ १०
[5] क्षीण चंद्र लग्न में हो पाप ग्रह केन्द्र या अष्टम में हो [जा०पारि०] । [९]
लग्नेश नीच राशि में हो या लग्न से अष्टम हो और शनि भी नीच में हो या सप्तम
हो [ जा० पारि० ]। [१०] शनि सूर्य मंगल १२-८-९ भाव में हों उन पर शुभ ग्रह
की दृष्टि न हो [ वृ० पा० ] 1 [११] क्षीण चंद्र लग्न में हो जिसके द्रेष्काण या सप्तम
भाव में पाप ग्रह न हो [ वृ० पार ] 1 [१२] सम्पूर्ण ग्रह अष्टम में हों तो मृत्युप्रद हैं
यदि चंद्रमा हो तो विशेष कर मृत्युप्रद है [ मान० ]। [१३] यदि सूर्य चंद्र शनि त॑नों
पाप ग्रह युक्त हों तो मृत्यु हो । [ जा०सं० ]। [१४] सब केन्द्र भाव पाप ग्रह और