सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 231, कुल 454 में से
संदर्भ में पढ़ेंआयुर्दाय विचार : २२१
[ गंडांत ] में जन्म हो और ६-८-१२ भाव में पाप युक्त चन्द्र हो । [ स० चि० |
[ ४३ ] सूर्य सप्तम में, चन्द्रमा लग्न में पाप ग्रह युक्त हो । [ जैमि० ] [ ४४ ]
सप्तम में शुक्र शनि और मंगल हो । [ जैमि० ] [ ४५ ] मंगल सप्तम या अष्टम
घर में पाप ग्रह से दृष्ट हो । [ जैमि० ] [ ४६ ] चन्द्र सूर्य लग्न में हो सब पाप ग्रह
व्यय भाव में हों जिस पर कोई शुभ दृष्टि न हो [ स० चि० ]। | ४७ ] २, ६, ८,
१२ भाव में पाप ग्रह हो । [ वृ० पारा० ] [ ४८ ] पाप ग्रहों के बीच लग्न न हो ।
[ वृ० पा० ] [ ४९ ] पाप युक्त चन्द्र १, ७, ९ भाव में हो शुभ ग्रह का योग या
दृष्टि न हो । [ व॒० पारा० ] [ ६० ] संध्या समय जन्म हो [ अर्थात् सूर्य बिम्ब:
अस्त होने के १॥ घडी पहिले और अस्त के बाद १॥ घड़ी यह ३ घड़ी संध्या का
समय है ] लग्न में चन्द्र का होरा हो और कोई भी पाप ग्रह राशि के अंतिम नवांश
में हो [ वृ० जा० ]। [ ५१ ] लग्नेश या चन्द्र का शत्रु पाप ग्रह लग्न में हो परन्तु
वह पाप ग्रह मित्र हो तो उसकी मृत्यु नहीं होगी [ स० चि० ]। [ ५२ ] छग्न
निगड़ पक्षी पाश या सपं द्रेष्काण में हो पाप ग्रह युक्त हो शुभ ग्रह या लग्नेश की
दृष्टि न हो [ स० चि० ]1
मिथुन का दूसरा ककं का तीसरा मकर का पहिला
पक्षी सपं निगड़ द्रेष्काण है ।
[५३] लग्नेश आपोक्लिम में हो, ६, ८ घर में पाप. ग्रह हो जिन पर शुभ दृष्टि
न हो [ सं० चि० ]। [ ५४ ] चन्द्र दो पाप ग्रहों के बीच में १, ७, ८, १२ भाव में
कहीं हो [ वृ० पा० ]। [ ५५ ] चतुथं में सूर्यं हो शनि से दृष्ट हो कोई शुभ ग्रह
की दृष्टि न हो [ जा० भ० ]। [ ५६ ] लग्न से ९ या १० भाव में मंगल सहित चंद्र
हो और पाप ग्रह से दृष्ट हो [ स० चि० ]। [ ५७ | सूर्य चन्द्र व्ययस्थान में और
व्ययेश लग्न में हो [ स० चि ]।
न जीये--[१] लग्न में सूर्य, पंचम घर में चन्द्र, सब पाप ग्रह अष्टम में हों
[मान०] । [२] ऊग्न से सप्तम में शनि, अष्टम में चन्द्रहो [ मान० ] । [३] लग्न या
अष्टम में राहु हो चन्द्र से दृष्ट हो । [४] लग्न में सूर्ये पंचम में चन्द्र हो कोई पाप ग्रह
लग्न या अष्टम में हो तो.वालक नहीं जिये । [५] गुरु बुध शुक्र इन तीनोंमें से कोई ग्रह
नीच के राहु रि युक्त हों उन्हें चन्द्र न देखदाँ हो । [६] ६,८ घर में चन्द्र हो १२ वें घर
में सूर्य मंगल हो । [७] ६ या = घर में केतु और केन्द्र में चन्द्र हो | मान० ]।
जीना कठिन हो
[१] लग्न से दूसरे घर में स्वगृह और कूर ग्रह हो ४, १० घर में भी कर ग्रह
हो [ मोन० ]। [२] लग्न में स्वगृही क्रर ग्रह हो ४ घर में भी कूर ग्रह हो तो जीना
कठिन हो । जीता रहे तो माता को दुःख देवे मातृ पक्ष का क्षय करे । [३] क्रूर ग्रह
के घर में सूये हो, कन्या राशि में भी क्रूर ग्रह हो क्रूर क्षेत्र में राहु हो तो जीना कठिन
हो [ भान० ] 1