सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 232, कुल 454 में से
संदर्भ में पढ़ें२२२ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड
शीघ्र मरने का अरिष्ट योग
शीघ्र मरण १--शनि मंगल और सूर्य एकत्र अष्टम में या षष्ठ में हों शुभ ग्रह
युक्त दृष्ट न हों [ जा० पारि० ] । २--सप्तम या अष्टम में चन्द्र पाप ग्रह युक्त हो
शुभ ग्रह की दृष्टि न हो केन्द्र में भी शुभ ग्रह न हो [ प्रा० यो० ]। यदि शुभ ग्रह
देखते हों तो ८ वर्ष में मृत्यु हो [ जा» पारि० ]। ३--चन्द्र षष्ठ या अष्टम स्थान
में हो उसे पाप ग्रह देखते हों [ जा० सं० ] । ४--अष्टम स्थान व केन्द्र में पाप ग्रह
हो लग्न में क्षीण चन्द्र हो [ प्राण यो० ] । ५-अष्टम में मंगल के घर का गुरु हो
उस पर सूर्य चन्द्र व शनि की दृष्टि हो केवळ शुक्र न देखता हो [ प्रा० यो० | । ६-
६, ८, १२ स्थान में शुभ ग्रह हो त्रिकोण या केन्द्र में पाप ग्रह हो ककं लग्न हो [प्रा.
यो. ] | कके लग्न न भी हो तो यह होता है [ छ० चं० ] । ७--४, ७, ८ वें स्थान
में ग्रह हो व चन्द्र पाप ग्रह के बीच हो [ जा० भ० ]। ८--दशम में सूर्य मंगल
के घरया शनि के घर में हो उसे पाप ग्रह देखते हों [ प्रा० यो० ] ९--दशम या
लग्न में वृश्चिक राशि हो पाप ग्रह पूर्व षट्कांत में, शुभ ग्रह उत्तर पट्कांत में हो यह
बख्र दृष्टि योग हो जाता है । [ प्रा० यो० ]। १०--चतुर्थ स्थान, चन्द्र व सूर्य युक्त
या दृष्ट हो शुभ ग्रह युक्त दृष्ट न हो तो जन्मते द्वी मरे । [ प्रा० यो० ] । ११--
प्रात; या सायंकाल की संध्यां में जन्म हो उस राशि के अन्त्य नवांश में पाप ग्रह हो ।
लग्न में चन्द्र की होरा हो चारों केन्द्रों में पाप ग्रह व चन्द्र हो तो शीघ्र अरिष्ट हो
[ प्रा० यो० ] । १२--क्षीण चन्द्र व्यय भाव में हो पाप ग्रह लग्न और अष्टम में हो
केन्द्र में शुभ ग्रह न हो [ जा० पारि० ]। १३--चंद्र ६, ८ घर में हो ४, ६, ८, १२
'घर में राहु हो तो तत्काल मृत्यु हो ईश्वर पूजन आदि से १ वर्ष की आयु हो जावे
[ जा० सं० ]।' १४--जिस राशि पर केतु [ शिंखी ] का उदय हो उसी राशि में
जन्म हो जन्म के पहिले या पीछे निर्घात शब्द हो या प्रचंड वायु चले या वज्ञपात हो
या जन्म समय रौद्र सारे मुहूर्त हो । [ जा० भ० ]। १५--त्रिकोण में पाप ग्रह ६,
८ घर में शुभ ग्रह हो लग्न में नीच का अष्टमेश हो [ वृ० पा० ]। १६--अष्टमेश
और अष्टम भाव पाप ग्रह युक्त मौर व्यय भाव में पाप ग्रह हो तो जन्मते ही मरे
[ वृ० पा० ] । १७--शनि सप्तम या लग्न में हो, जलचर राशि या वृश्चिक राशि में
चन्द्र हो, शुभ ग्रह केन्द्र में हो [ जा० पारि० ]। १८--लग्न से चतुर्थ में राहु हो,
६, ८ घर में चन्द्र हो [ मान० ]। १९--छग्न से ४ या ९ घर में सुर्य, अष्टम में
गुरु, १२ वे चन्द्र हो [ मान० ]। २०--छग्न से वारहवे राहु शनि वुध हो, गुरु
लग्न या पंचम में हो [ मान० ]। २१- लगन से अष्टम में राह ओर केन्द्र में चन्द्र
हो [ मान० ]। २२--लग्न में क्रूर ग्रह हो ६, ८ घर में चन्द्र हो [ मान० ]।
२३--सूर्य शनि, शनि राहु, मंगल गुरु लग्न में या पंचम में हों [ मान० ]। २४-लग्न
में गुरु, अष्टम में शनि ओर उसी घर में अन्य पाप ग्रह भी हो [ मान? ] । २५--गुरु
वक्री होकर शनि के घर में हो, सूर्य बुध सप्तम हो तो वांछित मृत्यु पावे [ मान० ]।
२६-+मंगलछ व शनि लग्न में, सूर्य सप्तम में हो [ प्रा० यो ] [ जा० भा० ]। २७--
मंगळ शनि चन्द्र लर्न में, सूये सप्तम हो [ प्रा० यो० ] [ जा० भ० ] । २५--लग्न