सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 240, कुल 454 में से
संदर्भ में पढ़ें२३० : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड
शत्रु अधिक हों १० वर्ष में मृत्य, हो ( जा० पारि० ) । १३२-चतुर्थ में राहु ६,८
भाव या केन्द्र में चन्द्र हो । १३३-सप्तम में राहु हो ( मान० )1
१०-१२ वर्ष में मृत्य, १३४-राहु सप्तम हो सूयं ओर चन्द्र की दृष्टि हो णुभ
गृह की दृष्टि न हो ( स० चिं० ) ।
१०-१२ यो १६ वर्ष आय्, १३४-पाप गूहों से दृष्ट राहु केन्द्र मे हो (ल०चं०) ।
राहु अन्य केन्द्र मे इतना अनिष्ट नहीं करेगा जितना कि लग्न और दशम मे. अनिष्ट
कारक है ।
११ वर्षे आय्, १३६-वुध सूयं के साथ हो शुभ दृष्ट हो ( जा० पारि० ) ।
१३७-शुभ दृष्ट भी बुध सूर्या चंद्र से यू क्त हो ( जा. सं.) । १३८-लग्न मे शनि
हो बुध सूयः चंद्र से युक्त हो पाप गृह की दृष्टि हो ( प्रा. यो. )। १३९-केन्द्र भाव
पाप गृह से युक्त हो शनि गुरु परस्पर एक दूसरे के स्थान मे हों अर्थात् शनि की राशि
में गुरु और गुरु की राशि में शनि हो (जा० सं०)। १४०-शनिके घर का गुरु अष्टम
में हो पाप ग्रह से दृष्ट हो ( प्रा० यो० ) । १४१-सूयं बुध साथ हो शुभ ग्रह से दृष्ट
न हो (स० चि) । १४२-सूय चन्द्रमा युक्त बुध हो पाप ग्रह से दृष्ट हो (जा० भ) ।
१२ वर्ष आय्, १४३-मंगल के घर में गुरु हो गुरुके घर में मंगल हो (मान०) ।
१४४- राहु लग्न से अष्टम में हो शुभ दृष्ट हो, शनि और सूय से दृष्ट हो (मान०) ।
१४५-शनि के घर में सूर्य, सूर्य के घर में शनि हो (मान०)। १४६-सिह में चन्द्र हो
सूय शनि युक्त अष्टम में हो शुक्र से दृष्ट हो (जा. पारि.) । १४७-शनि वृश्चिक के
नवांश में हो सूय से दुष्ट हो तो पिता से बैर करे १२ वर्ष में मृत्यु हो (जा. पारि) ।
१४८-सप्तम में राहुहो उसे शनि ओर सूर्य देखते हों शुभ ग्रह की दृष्टि न हो (प्रा.यो.)
(जा. भ.) । १४९-दशम मे राहु हो तो माता-पिता को पीड़ा देवे १२ वर्ष जीवे
(लू. चं) । १५०-सप्तम मे राहु सूय चन्द्र से दृष्ट हो शुभ गृह से दृष्ट न हो ( स.
चि.) । १५१-चन्द्र राशीश सूय शनि से युक्त अष्टम में हो (स. चि.) । १५२-
लग्नेश तथा जन्म राशीश लग्न से ६,८,१२ भाव में सूय य्क्त हो शुभ गृह युब॒त
या दृष्ट न हो (स. चि) । १५३- लग्न में मंगल अष्टम में गुरु हो ।
१३ वर्षो की आय्, १५४-तुला के नवांश में शनि हो गुरु की दृष्टि हो माता-
पिता का वैरी हो मृत्यु १३ वर्ष में हो ( जा. पारि. ) ।
१४ वर्षो आय्, १५५-कन्या के नवांश में शनि हो बुध से दुष्ट हो जातक क्रोधी
होकर १४ वष मे मरे (जा. पारि. ) ।
१४ वर्षो आय् १५६-सिंह के नवांश में शनि हो राहु से दृष्ट हो तो शस्त्र से
घाव लगे १५ वष मे मृत्यु, (जा. पारि. ) हो ।
१६ वर्ण आय्, १५७-ककं के नवांश मे शनि हो गुरु से दृष्ट हो तो सपे भय हो
और १६ वर्ष मे मृत्य, हो (जा.पारि.) । १५८- लग्न से सप्तम में या नवम मे शत्रु
क्षत्री राहु हो (मान.) । १५९-लग्न से सप्तम मे' शत्रु क्षेत्री राहु हो ( छ. चं. ) ।