सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 243, कुल 454 में से
संदर्भ में पढ़ेंआयुर्दाय विचार : २३३
२९ वर्ष आयु २०३-चन्द्रमा का शनि से स्थान या दृष्टि से सम्बन्ध होकर अप्टम में हो सूर्य भी अष्टम में हो [ जा० पारि० ] 1 ३० वर्ष आयू २०४-ल्ग्न से १२वें भाव में बुध युक्त चंद्र हो अष्टमेश किसी केन्द्र में निर्वल शुभ गूहों से युक्त या दुष्ट हो [ स. चिं ]। २०५-लग्नेश व अध्टमेश दोनों वलहीन होकर केन्द्र में हों [ जा. ल. ]। २०६--सब शुभ गूह शुभ ग्रहों के नवांश में हों [ जा. ल. ] । २०७-केन्द्र में कोई शुभ गृह न हो अष्टम में कोई एक ग्रह हो [ जा. लं. ] । २०८-बल युक्त शुभ गृह केन्द्र म हों अष्टम में कोई ग्रह न हो [ जा. भ. ] । २०९-बुध वली होकर केन्द्र में हो अष्टम में ग्रह न हो [ जा. ल॑" ]। २१०-गुर यदि सूर्य चन्द्र से और चन्द्र शनि मंगल से दृष्ट हो शुक्र से दुष्ट न हो अष्टम में मंगल का घर हो [ ल. चं. | । २११-केन्द्र में शुभ ग्रह हो अष्टम में कोई भी ग्रह न हो व शुभ गूह की दृष्टि हो [ प्रा. यो. ]। २१२-स्थान आदि बल से परिपूर्ण बली शुभ गुह चारों केन्द्र में हो अष्टम में कोई गृह न हो । केन्द्र गत ग्रह पर शुभ दृष्टि हो [ मान. ] ।
३१ वषं आयु २१३-सूर्यं लग्न में २ पाप ग्रहों के बीच हो [ जा. लं. ]
३० या ४२ वर्ष आयु २१५-अष्टमेश केन्द्र में हो लग्नेण बलहीन हो [वृ. पा] । २१६-ऊग्नेश और अष्ठमेश में से कोई अष्टम में हो दूसरा बलहीन हो [ स. चिं ]। २१७-लग्न में वली पाप गृह हो शुभ गूह पणफर और आपोक्लिम में हो, अष्टमेश के नवांश में शनि हो [ स. चि. ]। २१८-पाप ग्रह एक दूसरे के घर में हो लग्नेश पर पाप दृष्टि हो निवळ चन्द्र १२ वें भाव में हो [ स. चि. ]। २१९-पाप गृह एक दूसरे के राशि गत होकर लग्न मे हो-और चन्द्रमा १२ वाँ हो [ स. चिं. ]। २२०- चंद्र और लग्नेश आपोक्लिम में हो और अष्टमेश पापयुक्त ओर बलहीन हो [स. चि] २२ और ३२ वर्ष आयु २२३-छग्नेश और अष्टमेश के वीच चन्द्र हो । गुरु लग्न से १२ वें हो तो २२ ओर ३२ वर्ष के भीतर मृत्यु हो [ स. चि. ]। 2 ३२ वर्ष आयु २२२-लग्नेश और चन्द्रमा आपोक्लिम में हो, चन्द्रमा निर्बल हो
कर ग्रहों से दृष्ट हो [ जा. ल॑. ] । २२१-छग्न निवंछ हो और पाप युक्त हो, क्षीण चद्र पाप युक्त हो अष्टमेश केन्द्र या अष्टम में हो ( जा. पारि. ) । २२४-हीन वळी ग्रह पाप युक्त लग्न में हो, क्षीण चंद्र सूय युक्त हो, अष्टमेश केन्द्र में पाप ग्रह अष्टम भाव में हो ( स. चि. ) । २२५-ऊग्नेश और अष्टमेश केन्द्र में हो कोई गृह अष्टम में हो और शुभ ग्रह केन्द्र में हो ( स. चि. ) । २२६-सू्य चंद्रयुक्त केन्द्र में हो अष्टमेश केन्द्र में हो, पाप ग्रह अष्टम में हों, लग्न में कोई ग्रह न हो ( स. चि. ) । २२७-अष्ट
मेश लग्न में हो लग्नेश वलहीन हो ( स. चि. ) ।
३३ वर्ष आयु २२८-चन्द्रमः, मंगल की राशि का लग्न में हो पाप ग्रहों से दृष्ट हो शुभ ग्रह केन्द्र में हो ( स. चि. )। मङ्गल की राशि लग्न में हो उसमें चंद्रमा हो अभ्य मत है कि पाप गूह ओर शुभ ग्रह केन्द्र के बाहर हो। ८२९-चन्द्रमा और अष्टमेश पाप युक्त होकर केन्द्र या कोण में हो दशम भाव स्थित पाप गृह की दृष्टि हो