भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

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२३४ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड

( स. चि. )। २३०-शनि और चन्द्र लग्न में हो मङ्गल कुम्भ का हो (स. चि. |।

३६ वर्ष आयु २३१-गुरु और शुक्र केन्द्र में हो लग्नेश पाप युक्त होकर आपो- बिलम में हो संध्या का जन्म हो (स. चि.) । २३२-बलहीन सूर्य दो पाप गूहों के

बीच शत्रु राशि में होकर लग्न में हो शुभ गृह से दुष्ट न हो (स. चि. ) । २३३

लग्न में चन्द्र और मङ्गल हो । केन्द्र और अष्टम में शुभ गृह न हो लग्न में मान्दि

हो (सः चिं. ) ।

३७ वर्ष आयु २३४-षण्ठ भाव में बुध हो ( जा. सं )। २३५-ऊग्न में सूर्य २

पाप गूहों के बीच हो लग्न से अष्टम में मिथुन का गुरु हो (स. चि.) । २३६-

मिथुन में लग्नेश हो, गुरु चतुर्थ में पाप गूहों के बीच हो (स. चि. )।

४० वर्ष आय्‌, २३७-बली बुध केन्द्र में हो लग्न से अष्टम स्थान शुभ गृह से

दृष्ट हो ( जा. ळं. ) । २३८-अष्टमेश लग्न मों हो अष्टम स्थान में कोई शुभ गूह न

हो ( जा. छं. ) । २३९-८ और १२ भाव में कूर गूह मध्य में क्रूर गृह ओर शुभ गृह

दोनों हों तो राजयोग होता है आय्‌, ४० वर्ष ( ल. च. ) । ९४०--वळी शुभ गूह केन्द्र में हो अष्टम में कोई गूह न हो तो ३० वषे आय, होती है शुभ गूह देखते हों तो ४० वर्ष की आय्‌, हो ( जा. भ. ) । २४१--गुरु त्रिकोण में एवं स्वगृही हो

( मान. ) ।

४२ वषं आय्‌, २४२--अष्टमेश लग्न में हो मंगल भी लग्न में हो या ८,१२ घर

में स्थिर राशि में हो ( स. चिं. )।

४४ वषं आय्‌, २४३--छग्न चर राशि में हो गुरु केन्द्र में शनि दशम में हो (स.

चिं.) । २४४--सूयं और शनि मकर राशि में छन्न से ३ या ६ घर में हो अष्टमेश

केन्द्र में हो ( जा. ल॑. ) । २४५--उच्च का मंगल लग्न में, गुरु सप्तम, शनि दशम

में हो तो धनवान व शास्त्रो हो । आय, ४४ वषं हो ( स. चिं. )। २४६--लग्नेश

पाप यक्त अष्टम में हो शुभ गृह केन्द्र में हो (स. चिं )।

४५ वषं आय्‌, २४७--छग्नेश पाप यक्त अष्टम भाव में, अष्टमेश पाप यक्त

छठे भाव में हो दोनों बलवान्‌ हों, शुभ दृष्टि रहित हों ( स. चिं. ) । २४८--चन्द्र

राशि का स्वामी लग्न से अष्टम में पाप यक्त हो और लग्नेश पाप यक्त षष्ठ में हो

दोनों बहीन हों शुभ दृष्टि रहित हों ( स. चिं. ) ।

आय्‌, ४८ वर्ष २४९--मकर लग्न में मंगल हो, दशम में तुला मों शनि और

गुरु हो तो वह धनी और कई विद्या का ज्ञाता हो ४८ वर्ष आय्‌ पावे [ स. चिं ]।

२५०--मेष लग्न में पूर्ण चंद्र हो शुभ ग्रह से दृष्ट हो तो वह स्वामी या राजा हो ऐसे

चंद्र पर यदि पाप दृष्टि हो तो ४८ वर्ष आय्‌, हो [ स. चिं. ] ।

आय ५० वषं २५१--लग्न से ४ या १० घर में बुध हो १, ८, १२ घर में चंद्र

हो और गुरु शुक्र एक साथ हों । $

५२ वर्षे आय्‌, २५२--लग्न में शनि दूसरे गूहों से य्‌वत हो और चंद्र ८ या

१२ घर में हो तो वेदान्ती ओर घामिक होगा आय्‌, ५२ वषं की होगी [ स. चिं. | ।