भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

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आयुर्दाय विचार : २३५

२१३--दिस्वभाव ललल में शनि हो चंद्र ८ या १२ घर में हो। ५५ वषं आयु २५४--कर्क या सूर्यं छथ्न में हो, पाप युक्त चन्द्र दशम में हो गुरु केन्द्र में हो [ जा. लं. ]।

५७ वर्ष आयु २५५--लग्नेश धन में गुरु यक्त हो, अष्टम में राहु या केतु हो [ स. चिं. ] । २५६--धन का गुरु लग्न में, अष्टम में मंगल राहु हो[स. चिं. ]। ५८ वषं आय्‌, २५७--अष्टमेश सप्तम में चन्द्रमा पाप यूक्त ६, ८ भाव पें हो [ स. चिं. ]। २५८--लग्नेश युक्त चन्द्र ६, ८, १२ भाव में हो लग्नेश शनि के नवांश में हो [ जा. लं. ]। २५९--छग्न से ३, ५, ९, ११ भाव में कहीं गुरु शत्रु ` क्षेत्री हो [ मान. ]।

६० वर्ष आय्‌ २६०--लग्न में गुरु और तृतीयेश हो किसी केन्द्र में कुंभ राशि हो जिसमें पाप ग्रह हो वह ब्रह्म ज्ञानी, योगी ओर सुखी होकर ६० वर्ष आय पावे [ स. चिं, || २६१--लग्नेश बारहवें हों अष्टमेश लग्न में हो अष्टम में पाप गृह हो तो वह नीच हो अपमान से अपने कुटुम्ब के आश्रित रहे आय्‌, ६० वर्ष हो [सःचिं.] । २६२--दशम में शुक्र हो बुध गुरु ओर चंद्र से दृष्ट हो गुरु पञ्चम में हो वह धनी होकर राजा होगा आय्‌, ६० वर्ष होगी [ स्वं चिं. ]॥ २६३--लग्न में शनि, चौथे चंद्र, सप्तम मंगल, दशम सूय' हो बुध गुरु शुक्र में से कोई केन्द्र में हो तो वह स्वामी या राजा हो आय्‌ ६० वर्ष हो [ स. चिं, ] । ६० वर्ष आय्‌, २६४--लग्न में शुक्र, केन्द्र में बुध शनि, और ३ , ११ भाव में शेष गृह हों वह स्वामी होकर ६० वर्षा जिये [ स. चिं. ] । २६५--छग्न से चतुर्थ में कोई गृह हो, गुरु और शुक्र केन्द्रों में हों या लग्न में हों तो अच्छा स्वभाव हो आय, ६० वर्ष हो [ स. चिं. ]। २६६--बुघ गुरु शुक्र यो शुभ गूह केन्द्र में हों चन्द्रमा उच्च का हो लग्नेश बली होकर लग्न में हो [ जा. ल॑. ] । २३७--च द्र स्वस्थान या लग्न में हो सप्तम में शुभ प्रह हो [ जा. ळं. ] । २६८--वृष का चंद्र लग्न मे हो और शुभ गृह स्वस्थानी हों [ जा. ल॑. ] २६९--पाप ग्रह युक्त लग्नेश त्रिक मे' हो शुभ ग्रह अष्टम स्थान छोड़कर ओर कहीं हों [ जा. लं. ] । २७०--लग्नेश व जन्म राशीश दोनों सूयं से युक्त लग्न के अष्टम स्थान मे' हों और गुरु केन्द्र मे न हो [ जा. लं ]।

६४ वष आय्‌ २७१--दिन मे' जन्म हो चंद्र से अष्टम भाव मे पाप ग्रह हो तो मध्याय्‌, ६४ वर्षा की हो [ जा. लं. ] । ६५ वर्ष आय्‌, २७२--चंद्रमा ककं का लग्न मे हो, नीच का शनि सप्तम सूया हो तो श्रेष्ठ ज्ञानी हो ६५ वषः आय्‌ हो [ स. चिं. ] । २७३-शनि नीच का होकर केन्द्र या कोण मे हो या सूय शुभ ग्रह युक्त केन्द्र मे हो तो वह समझदार अगुवा हो आय्‌, ६५ वर्ष हो [ स, चिं. ]।

६६वर्ष आ. २७४--लग्नेश और चंद्र राशीश अष्टम मे हों अष्टमेश केन्द्र मे हो वह मान और घन यक्त मनुष्यों का नेता हो, आय्‌ ६६ वष की हो [सःचिं]।