भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

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२३६ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड

२७४--लग्न मे गुरु सूय और बुध हो, चंद्र १२ वें हो, शनि मीन का हो तो धनी,

शास्त्र मे निपुण होकर ६६ वर्ष जीयो [ स. चि. ] । २७६--लग्न मे उच्च का चंद्र

हो शनि नीच का होरवि सप्तम हो तो धनवान होकर ६६ वर्षा जोये [ स. चिं. ]।

६० या ६६ वर्षा आय्‌, २७७-- लग्नेश तथा तत्काल होरेश अष्टम में हो तो

कीति और धनय्‌ क्त राजा हो, आय्‌, ६६ वर्ष हो । नंदोक्त मत से ६० वर्ष आय, हो

[ स. चिं. |।

६८ वर्ष आय्‌, २७८--सूया और चंद्र दशम में, शनि लग्न म॑, गुरु चतुर्थ मे

हो तो राजा हो ६८ वर्ष आय्‌ हो [ स. चिं. ] ।

७० बषः आय्‌, २७९--मंगछ पंचम मे, शनि नीच का, सूयं सप्तम हो [ स.

चिं. ]। २८०-केवल गुरु लग्नेश से केन्द्र में हो [ स. चिं. ] । २८१- गुरु केन्द्र

में हो, चन्द्र लग्न में हो या अपने अंश मे हो या मीन या ककं राशि का हो अष्टम घर

खाली हो ( स. चि. ) । २०२-- बहुत वली शुभ ग्रह केन्द्र मे. हो अष्टम में कोई शुभ

ग्रह न हो उस पर लग्नेश की दृष्टि हो ( स. चि. ) । २८३-छग्न या चन्द्र दोनों क्रूर

ग्रहों के योग या दृष्टि से रहित हो, लग्न में गुरु हो, केन्द्र में शुभग्रह हो अष्टम भाव

में काई ग्रह न हो । ( जा. लं. ) । २८४--लग्न में सूर्य अपने शत्रु या मङ्गल युक्त हो

गुरु बलहीन हो चन्द्रमा लग्न से १२ वें या ५ वे स्थान मों हो। २८५--लग्न म गुरु

और ३, ६, ११ घर में पाप ग्रह हो लग्नवर्ती गुरु पर पाप ग्रह की दृष्टि न हो । शुभ

ग्रह केन्द्र में हों अष्टम में कोई ग्रह न हो ( जा. भ. )। २८६--नीच का शनि केन्द्र

या त्रिकोण में, शुभ ग्रह केन्द्र में या सूयं और बुध केन्द्र में हो तो ज्ञानी, धमं पीड़ित

होकर ७० वर्ष जिये ( स. चि. ) । २८७-लग्न में गुरु नवम घर में चन्द्र हो उस

पर पाप गृहो की दृष्टि न हो,सब गृह केन्द्र में हों अष्टम में कोई गृह न हो (मान.) ।

२८८--यदि केन्द्र में सूय मङ्गल और शनि व षष्ठेश हो और ८ या १२ भाव में गुरु

और चन्द्रन हो वह विद्वान्‌ मानी ज्ञानी योग्य तत्पर होकर ७० वर्ष जियेगा (स. च.) ।

७० वर्ष से ऊपर दीर्घायु २८०९-शुभाशुभ सभी गृह लग्न से ६ भाव तक होया

सप्तम से व्यय तक होवें तो दीर्घायु ७० से ऊपर हो। यदि अन्य प्रकार होंतो

विपरीत फल ( स. चि. ) ।

७२ वर्ष आयु २९०-शुभ गृह लग्न या चन्द्र से केन्द्र में हों लग्न के दशवे स्थान

में स्थित क्रूर गृहो से युक्त या दृष्ट न हो ( जा. छ. ) ।

७३ वर्ष आयु २९१--चन्द्र शुभ गृहों के षडवरं में हो, सव शुभ गूह बली हों

लग्नेश को कूर गूह देखते हों ( जा. ल. ) ।

८४ वर्ष की आयु २९२--सब शुभ गृह बलवान होकर लग्न से पहिले घर में हों

और सब पाप गृह आगे के ६घरों में होकर बलवान्‌ हों तो अच्छा स्वभाव उन्नतिशील

और आनन्दमय होकर ८० वर्ष जियेगा ( स. चि. ) । २९३- चन्द्र गुरु युक्त केन्द्र मे

हो शुभ गृह से दुष्ट हो ओर दूसरे ग्रह अपने स्वभाव को छोड़ कडू दूसरे घरों में हों

( स. चि. ) । २९४- गुभ ग्रह अपने मूल त्रिकोण मे हों गुरु उच्च का लग्न में हो

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