सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 256, कुल 454 में से
संदर्भ में पढ़ें२४६ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड
भंगकर ग्रहों के बलाबल पर विचार कर देखना कि कौन बली है। रिष्टभंगकर ग्रह वली
होंगे तो अरिष्ट नहीं होगा ।
इसका विचार गणित खंड में दिया है जिससे प्रगट होता है कि शुभत्व कितना है
और अशुभत्व कितना है ।
यहाँ स्थूल रूप से उसका विचार बताया जाता है रिष्टेश और भंगेश दोनों प्रकार
के ग्रहों में देखो ।
(१) ग्रह शुभ है या पाप (२) उसका प्रभाव मिलाकर अच्छा है या बुरा (३)
उसकी स्थिति क्या है। उच्च राशि, मूल त्रिकोण, स्वगृही, मित्र क्षेत्री, शत्रु क्षेत्री,
नीच अस्तंगत आदि में कसा है ।
फिर वर्गों में एक दूसरे का बळ घटाकर अन्तर निकालना । रिष्ट बड़ा होतो
रिष्ट होगा यदि भंगेश्वर बड़ा हो तो रिष्टकर का बुरा प्रभाव निकल जायगा । यदि
दोनों बराबर हों या बहुत अधिक अन्तर हो तो रिष्ट नहीं होगा ।
इसके लिए ग्रहों का राशि होरा द्रेष्काण आदि वर्ग ऊपर बताये प्रकार से अच्छा
या बुरा प्रभाव है।
अर्थात् स्वामी की स्थिति उच्च मूल त्रिकोण स्वक्षेत्र अधिमित्र, मित्र, सम, शत्रु,
अधिशत्रु के घर का है बलवान् या निंर है,ग्रह की युद्ध में स्थिति,अस्तंगत नीच आदि
के कारण स्थिति । इन परिस्थितियों को अच्छी प्रकार तौलना चाहिए। फिर उनकी
अच्छी या बुरी स्थिति पर से विचारना कि रिष्ट होगा या नहीं होगा ।
साधारण प्रकार से उनकी वर्ग में अच्छी और बुरी स्थिति को इस प्रकार
नम्बर देना ।
१-मित्र अधिमित्र मूल त्रिकोण आदि अच्छे घर का-१ नम्वर
२-शत्रु अधिशत्र आदि बुरे घर को-१ नम्बर
३-शुभ और पाप ग्रह को अच्छा या बुरा-१७१ नम्बर
४-उच्च और युद्ध जय को अच्छा-४ नम्बर
५-नीच अस्तंगत युद्ध में हारा-४ नम्बर
६-समत्व को कुछ नहीं गिना गया ।
कल्पित उदाहरण-मान लो शनि अरिष्टकर और मंगल अरिष्ट हर है--
वग मंगल शनि मंगल अरिष्ट हर अच्छा वुरा शनि अरिष्टकर
१ गृह ८ स्व० शत्रु गृह स्व० १ ० सूर्य ० १
२ होरा ४ मित्र ५ शत्र मंगल ० शंत्रू ० १
नीच होरा नीच ० ४ सूर्यं ० १
३ ब्रेष्काण १२मि ५ शत्रु चन्द्र १ ० शत्रु ० १
द्रेष्का” मित्र १ ० सूर्य ० १
४ सप्तांश ४ मित्र ६ मित्र गुरु १० शत्रु ० १
नीच