भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

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पृष्ठ 258

२४८ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड

में हैं या इन भावों पर जिनकी दृष्टि है । ३--सूर्य चन्द्र को छोड़कर मारक स्थान के स्वामी होने से सव ग्रह मारक होते हैं। ४--६, ८, १२ स्थान के स्वामी और राहु केतु भी मारक स्थान में पड़ने से मारक होते हुं । ५--उपरोबत प्रकार से मारकेश प्रकट न हों तो व्ययेश से युक्त शुभ ग्रह या ३,८ भाव के स्वामी या पप्ठेश मारक होता है । ६--आत्म कारक या लरत से तृतीयेश, पष्ठेश, अष्टमेश और द्वादशेश में जो बली हो वह मारक होता । ७--शुभ ग्रह २, ६ भाव के स्वामी हों व स्वोच्च मूल त्रिकोण में हों और इनका शुभ ग्रहों रे सम्बन्ध हो तो मारक होते हैं । ८--शुभ ग्रह गुरु शुक्र केन्द्रेश होने से दोष युक्त होते हूँ । ये यदि मारक स्थान में हों विशेषकर द्वितीय स्थान में या इन स्थानों के स्वामी हों तो प्रवल मारक होते हैं । द्वितीयेश, सप्तमेश या अष्ट- मेश मारकेश होते हैं ०रन्तु शनि और केतु महा मारक हैं। यदि पष्ठ स्थान में बहुत पाप ग्रह हैं तो पष्ठेश भी मुख्य मारक होता है। १०--शनि, मांदि, राहु गुलिक और अष्टमेश जहाँ हो उनके राशि का नवाश स्वामी भी मारक होता । ११-- विपत्ति और प्रत्यरि तारा ( जन्म नक्षत्र से तीसर और पांचवें नक्षत्र के स्वामी ) तथा वध तारा ( जन्म नक्षत्र से ७ वाँ तारा ) इसके स्वामी भी मारक होते हैं । जैसे धनिष्ठा नक्षत्र का जन्म है तो उससे तीसरा पूर्व भाद्रपद और पाँचवाँ रेवती. सातवां भरणी नक्षत्र हुए । जन्म नक्षत्र का जो चरण हो उससे ४-४ चरण का एक नक्षत्र जानना । जेसे धगिष्ठा के तीसरे चरण का जन्म है तो पूर्वाभाद्रपद का तीसरा चरण कुंभ राशि आया जिसका स्वामी शनि है, रेवती की मीन का स्वामी गुर और भरणी की मेष का स्वामी मंगल हुआ ये भी मारक हुए ।

मारकेश पर विचार--सवसे पहिले यह देखना कि कुण्डली में अल्प मध्य या पूर्णायु में क्या है । ग्रह की दशा निकाल कर यह जान लेना चाहिए कि अल्पादि आयु अनुमान से किस ग्रह की दशा में पूर्ण होगी । उस ग्रह की अन्तंदशा आदि निकाल कर कौन ग्रह मारक हो सकता है इसका विचार करना चाहिए । मारकेश अपनी अन्तर्दशा में मृत्यु का अरिष्ट करता हू मारक ग्रह अपनी दशा में मारक प्रभाव नहीं करते । विदशा, सुक्ष्म दशा, प्र(णदशा ग्रहा की इनमें कौन मारक है यह निश्चय करना चाहिए । वली कूर ग्रहों से सम्वन्ध होने से इनकी दशा में मारक ग्रह प्रभाव करते हैं ।

इस सम्वन्ध में मारकेश या मारक ग्रह का कब्र प्रभाव होगा, निम्न बातों पर विचार करना :--

६-जव २ या ७ भाव के स्वामी की महादशा हो उसके अन्तर में किसी दूसरे मारक ग्रह की अन्तदेशा हो । २-२, ७ भाव के स्वामी में से किसी मारकेश की महा- दशा हो और उसके अन्दर अष्टमेश की अन्तर्दशा हो । ३-अष्टमेश शुभ ग्रह की अन्तदंशा हो उसका त्रिकोण के स्वामियों से कोई सम्वन्ध न हो । ४-इधर मारकेश के अन्दर अष्टमेश की दशा हो । ५-मारकेश की महादशा के भीतर ऐसे अष्टमेश को दणा हो जो शुभ तो हो परन्तु त्रिकोण के अशुभ गृह स्वामियो से सम्बन्ध न हो । ६-किसी