सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 259, कुल 454 में से
संदर्भ में पढ़ेंमारक स्थान : २४९
मारकेश की महादशा के भीतर केन्द्रवर्ती शुभ ग्रह का अन्तर आवे | ७-मारकेश की
महादशा के भीतर केन्द्र स्वामियों की अन्तर्दशा हो जो शुभ ग्रह हो । ( केन्द्रेश शुभ
अच्छे नहीं होते) । ८-किसी मारकेश की महादशा के भीतर द्वादशेश की अन्तर्दशा हो
जो शुभ ग्रह न हो । ९-मारकेश की महादशा के भीतर ऐसे द्वादशेश की अन्तदंशा हो
जो शुभ ग्रह हो ५, ९, १, ४, १० भाव के स्वामियों से सम्बन्ध न रखता हो । १२-
मारकेश की महादशा के भीतर त्रिषडाय स्थान के स्वाभियों की अन्तदंशा हो । ११०
व्ययेश की महादशा में धनेश की अन्तर्दशा या धनेश के भीतर व्ययेश की अन्तर्दशा हो ।
१२-वे ग्रह जो धनेश और व्ययेश के साथ हों। १३-अष्टमेश की महादशा में पष्ठेश
का अन्तर या पष्ठेश के भीतर अष्टमेश का अन्तर । १४-व्यय भाव में जो ग्रह हों
कभी-कभी उनके अन्तर में । १५-मारकेश की महादशा में मारक स्थान में स्थित क्रूर
ग्रह की अन्तर्दशा में । १६-पाप ग्रह में पाप ग्रह का अन्तर । १७-शैनि पाप ग्रहों से
युक्त हो तो सबको दवाकर मृत्यु कारक होता है। १८-जब चन्द्र दुष्ट स्थान में पड़े
तो उसकी अन्तर्दशा में । १९-२, ७, १२, ८, ६ या ३ भाव के स्वामियों की अंतदेशा
में । २०-वारहवें या १० वें स्थान में केतु हो उस पर पाप ग्रह की दृष्टि हो तो उसको
अन्तर्दशा में । यदि शुभग्रह देखते हों तो मारक नहीं होता है । २१-पष्ठेश की दशा
भी मारक होती है।
इन सव पर विचार करना चाहिए इन सव में जो बलवान् होता है उसकी दशा
अन्तदंशा में मृत्यु होती है वही मारक ग्रह कहलायेगा ।
उपर जो विचार वताया है उसमें कुछ वाते ऊपर बताये के अनुकूल हों कुछ प्रति-
कूल हों अर्थात् सब वातं पूरी न हों तो शुभाशुभ से मिला फळ होता है मरण तो नहीं
होता मरण तुल्य कष्ट होता है ।
बहुत से ग्रह बलवान् होकर मारकेश हों तो उनकी दशा में रोग कष्ट आदि होता
है । बलवान् मारक ग्रह की दशा में मुत्यु या मृत्यु के तुल्य महारोग, भय, शोक,चोर
अग्नि भय आदि कष्ट होता है ।
लग्न के अनुसार शुभाशुभ व
मारक बिचार
अन्तर्दशा में त्रिकोण के स्वामी शुभ
होते है । त्रिषडाय ( ३, ६, ११ भाव ) के
स्वामी साहचर्यं वश शुभाशुभ होते हैं ।
केन्द्रेश-सम । केन्द्रेश पाप ग्रह शुभ, शुभ
ग्रह-अशुभ होते हैं ।
उदाहरण--
[१] जन्म मेप छग्न-मंगल अध्टमेश होने पर भी लग्नेश होने के कारण अशुभ
फल नहीं देगा । शुभ फल दायक ग्रह का सहायक होगा अर्थात् शुभ कारक ग्रह की