सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 261, कुल 454 में से
संदर्भ में पढ़ेंमारक स्थान : २५१
(७) तुला लस्न--गुरु ( तृतीयेश, षष्ठेश ), सूर्य ( लाभेश ), मंगल ( द्वितीयेश, सप्तमेश ) पाप फल प्रद हैं । शनि ( चतुर्थेश, पंचमेश ), बुध (नवमेश, व्ययेश) शुभ हैं। चन्द्रमा (दशमेश) है यहाँ चन्द्रमा और बुध ये राजयोग कारक हैं । मंगल मारक है। सूर्य गुरु भी मारक लक्षण वाले हैं । शुक्र ( लग्नेश और अष्टमेश दोनों होने से सम है।
(०) वृश्चिक लग्न--वुध ( अष्टमेश, लाभेश ), शुक्र ( सप्तमेश व्ययेश ) शनि (तृतीयेश, चतुर्थेश) पाप फल प्रद है। गुरु (द्वितीयेश पंचमेश) चन्द्र (नवमेश) शुभ हैं। सूर्य (दशमेश) और चन्द्र ये राजयोग कारक हैं मंगल षष्ठेश लग्नेश का सम है ।
गुरु मारकेश होने पर भी त्रिकोणेश होने के कारण नहीं मारता । शुक्र, बुध, शनि, पाप ग्रह मारक लक्षण वाले ग्रह होते हैं ।
(९) घनु लग्न--णुक्र (पष्ठेश, लाभेश) पाप प्रद है । सूर्य ( नवमेश ) मंगल
( पंचमेश, व्ययेश ) शुभ हँ । बुध सप्तमेश दशमेश है यहाँ सूर्य और बुध योग कारक हैं। चन्द्र अष्टमेश है। शनि ( द्वितीयेश, तृतीयेश ) मुख्य मारक ओर पाप ग्रह हैं । शुक्र भी पापी होने के कारण मारक लक्षण युक्त है । गुरु ( चतुर्थेश ओर लग्नेश ) सम है।
(१०) मकर लग्न-मंगल ( चतुर्थेश, लाभेश ) गुरु ( तृतीयेश व्ययेश ) चन्द्र ( सप्तमेश ) पाप फल प्रद हैं । शनि द्वितीयेश लग्नेश मारक होने पर भी स्वयं नहीं मारता । मंगल गुरु चन्द्र मारक होते हैं शुक्र सुयोग कारक है । सूयं अष्टमेश है ।
(१२) कुम्भ लग्न--गुरु ( द्वितीयेश छाभेश ), चन्द्र षष्ठेश, मंगल ( तृतीयेश दशमेश ) पाप फळ प्रद हैं । शुक्र (चतुर्थेश नवमेश) शुभ है । शनि (व्ययेश, लग्नेश), सम । सूर्य सप्तम होने से मारक है यहां गुरु सूर्यं मंगल मारक होंगे । बुध ( अष्टमेश पंचमेश ) मध्यम फल प्रद है।
(१३) मीन लग्न--शनि ( दशमेश, लाभेश ), शुक्र (तुतीयेश, अष्टमेश), बुः ( चतुर्थेश, सप्तमेश ) सूर्य ( षष्ठेश ) पापप्रद हैं । मंगल ( दितीयेश, नवमेश ), चन्द्र ( पंचमेश ) शुभ है। गुरु ( दशमेश, लग्नेश ) और मंगल राजयोग कारक है । मंगल मारकेश होकर भी नहीं मारता । बुध और शनि यहाँ मारक हैं ।
इस प्रकार मारक ग्रहों का विचार होता है । सूर्य चन्द्र को छोड़कर सब ग्रह मार- केश होने पर मारक होते हैं । मारक ग्रह बहुधा अपनी दशा में नहीं मारता । पाप फल प्रद ग्रह की अंतर्दशा में मारता है शुभ प्रद ग्रह की दशा में नहीं मारता । अन्य रीति से मारकेश विचार--
मांदि ग्रह से भी मारकेश निकाला जाता है । दिन इतवार | सोमवार | मङ्गल | बुध | गुरु | शुक्र | शनि सूर्योदय से घटी २२ |२ वाँ बा) | २२ | १८ ।१४।१०| ६ ।२ (दूसरा)
जिस लग्न में मांदि ग्रह है वही मारकेश समझना । वहाँ २-३ ग्रह हों तो उनमें