भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

पृष्ठ 262, कुल 454 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 262

२५२ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड

जो बलवान्‌ होगा वही मारकेश होगा । वहाँ कोई ग्रह न हो तो मांदि लग्न का स्वामी ही मांरकेश होगा ।

इष्ट दिन को कितनी घड़ी पर मांदि है ऊपर दिया है मान लो मंगलवार के दिन किसी का जन्म १५-५१ पर हुआ उस समय रा० ११-४९ का दिनमान २९-५४ था। मंगलवार को १८ वीं घड़ी पर मांदि है जैसा ऊपर चक्र में बताया है १८ वीं घडी इष्ट पर उस दिन का लग्न निकाला कर्के मांदि लग्न आई । कुंडली में कर्क में

कोई ग्रह नहीं था इससे ककं का स्वामी चन्द्र ही मारकेश हुआ ।

इसको गणित से इस प्रकार भी निकालते हैं-(दिनमान % उपरोक्त मांदि ध्रुवांक)

=३० मांदि इष्ट । इस पर से लग्न निकाल लो ।

यहाँ दिनमान घ०>२९प०५४ % मंगलवार काघ्रुवांक १८८(५७७-४८) + ३० =

घ०१८प०३५वि०३६ मांदि इष्ट आया । इस पर से लग्न निकाला तो ककं के १ अंश

आया । कर्के मांदि लग्न आंया । यहाँ ककं का स्वामी चन्द्रमा मांदि ग्रह मारक हुआ । चन्द्रमा मारकेश नहीं होता इससे मारक ग्रह का विचार ग्रह परिस्थितियों पर से

करना होगा ।

मारक ग्रह निश्चित करना

शनि मांदि गुलिक, राहु और अष्टमेश जहाँ हो उनकी राशि का नवांश स्वामी जातक को मारक होता है जबकि इनमें से किसी खराब ग्रह की दशा हो और शनि "उससे अष्टम में आवे ।

उदाहरण--लग्न कुंडली नवांश कुंडली

लग्न से अष्टमेश शनि है । चन्द्रमा से अष्टमेश बुध है जो लग्नेश भी है और

त्रिकोण में है । यहाँ अष्टमेश स्वतः शनि ही है । लग्नेश बुध है ।

नवांश में यह शनि ३ भाव में है जिसका स्वामी

गुलिक ५ ) „» >» सूर्य हैं सूर्य चन्द्र को छोड़कर

मांदि ¥ sss » चन्द्र. यहाँ बुध और गुरु ही

राहु ९ त 0) „ गुरु मारक हुए ।