सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 263, कुल 454 में से
संदर्भ में पढ़ेंमारक स्थान : २५३
" इन दोनों में गुरु निर्बेल है। लग्न कुण्डली में नोच का है और नवांश कुण्डली में अपने शत्रु शुक्र के घर में है । जिसकी दृष्टि भी है इससे गुरु मारकेश हो सकता है । । करन कुण्डली में भी यह गुरु शुभ ग्रह केन्द्रेश होने से और अष्टम में होने से खराब है इसके सम्मुख मांदि और गुलिक भी है । नवांश कुंडली में मांदि कर्क का है इससे शनि जब गोचर में ककं का होगा या ककं से अष्टम में अर्थात् कुंभ में होगा तब मृत्यु संभव है जवकि गुरु की अन्तर्दशा या प्रत्यन्तर दशा हो । मृत्यु समय
१-०जन्म काल में बलहीन लग्न हो तो लग्नेश अष्टमेश की दशा कष्ट देने वाली होती है और दशा के अन्त में सुख होता है । परन्तु लग्नेश वली हो तो अष्टमेश की दशा में मृत्यु होती है ।
२--अष्टमेश बली हो तो लग्नेश की दशा में मृत्यु होती है । ३--शनि लग्न या अष्टम में हो तो उसकी दशा अन्तदंशा में मृत्यू होती है । ४--छग्नेश और अष्टमेश जिस ग्रह से युत हो वह निर्बल हो तो उसकी दशा अन्तर्दशा में मृत्यु हो ।
५--लग्नेश अष्टम में या पाप ग्रहों से युक्त अष्टमेश अस्त हो या शत्रु गृह में हो तो मृत्यु हो ।
६--अष्टमेश ६,०,१२ भाव में कहीं हो तो उसकी अंतर्दशा में । ७--शनि जिस स्थान में हो उस स्थान के स्वामी की दशा और अष्टमेश को अंत्ईशा में ।
८--अप्टमेश की दशा ओर अष्टम स्थान में स्थित ग्रह को अंतर्दशा में । ९--अष्टम स्थान में २-३ ग्रह हों तो उनमें जो सबसे निर्बल हो उस ग्रह की अन्तर्देशा में ।
१०--लग्न से पंचम राशि के स्वामी से युक्त ग्रहों की दशा संख्या में १ २ से भाग देने से जो शेय बचे उसके समान संख्या वाली राशि में जब सूर्य आवे । ११--पंचमेश किसी अन्य ग्रह से युक्त न हो तो केवल उसी की दशा वर्ष से विचारना । १२--लस्नेश से युक्त ग्रह की दशा वर्ष में ३० का भाग देने से जो शेप बचे उतने दिन संक्रांति दिन से वीत जाने पर।
१३--ऊग्नेश अष्टमेश दोनों किसी भी ग्रह से युत होकर केन्द्र या कोण में स्थित हो तो अष्टम स्थान में स्थित ग्रह की दशा में निश्चय मृत्यु होगी । १४-ऊग्नेश अष्टमेश दोनों ६,१२ घर में होकर राहु या केतु के साथ हो तो लग्नेश या अष्टमेश से युक्त ग्रह की.दशा में मृत्यु होगी । अन्य मत लग्नेश किसमें शेष उपरोक्त ।
१५--यदि दोनों के साथ कोई भी ग्रह न हों तो उनसे युक्त राशि स्वामी की दशा में ।