सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 265, कुल 454 में से
संदर्भ में पढ़ेंमारक स्थान : २५५
२६--मंगल की दशा में शनि की अंतर्दशा हो तो चिर जीवी भी मृत्यु को
आप्त हो 1
२७--कूर राशि में पाप ग्रह ६या ८ घर में हो और शुक्र या सूर्य की उस पर
दृष्टि हो तो उप्त कूर ग्रह की दशा में मृत्यु होगी ।
२०--जन्म लग्नेश का शत्रू, ग्रह लग्नेश की दशा के अन्तर में जब आता है तव
अकस्मात् मृत्यु होती है ऐसा सत्याचायं का मत है ।
२९-मारक ग्रह अपने सम्बन्ध होने पर भी शुभग्रह (त्रिकोणेश आदि) की अंतर्दशा
में नहीं मारता किन्तु बिना सम्बन्ध के भी पाप ग्रह की अंतर्देशा में मरण होता है !
३०--अल्पायु वाले को-विपत्ति ( तृतीय ) तारा में मृत्यु भय ।
मध्यायु वाले को-प्रत्यरि ( पांचवीं ) तारा में या लग्नेश के शत्रू, की दशा में मृत्यु ।
दीर्घायु वाले को-वध ( सातवाँ ) तारा में या अष्टमेश की दशा में मृत्यु ।
३१-छग्न द्रेष्काण से २२ वां द्रेष्काण जो हो उस राशि का स्वामी तथा विनाश
नक्षत्र ( जन्म नक्षत्र से २३ वां) का स्वामी तथा ३, ५, ७, ताराओं के स्वामी और
चन्द्रमा जिस राशि में हों उससे द्वितीय और द्वादश स्थान के स्वामी यदि दोनों पापी
हों तो ये सब भी मारक होते हैं ।
३२--मारकेश की दशा में ६, ८, १२ भाव के स्वामी में से किसी किसी की
अंतर्देशा हो तो विशेष कर मरण संभव है ।
३३---राहु या केतु यदि लग्न से ७, ८, १२ भाव में या मारकेश से ७ भाव में
या मारकेश से युक्त हों तो वह मारक होता है ।
३४--मकर और वृश्चिक लग्न वालों को राहु मारक होता है ।
३५--६, ८, १२ भाव में राहु हो तो उसकी दशा काल में कष्ट होता है, यदि
उस पर शुभ ग्रह की दृष्टि या योग हो तो कष्ट नहीं होता 1
३६--दशमेश, अष्टमेश, लग्नेश और शनि के मध्य में राहु युक्त और बल
रहित जो ग्रह हो उसकी अन्तर्देशा में मरण या उसके साथी या दर्शी ग्रह की अंतर्दशा में मरण हो ।
३७--दशमेश बली हो तो लग्नेश की दशा में मृत्यु हो ।
३८--शीर्षोदय राशि में चर आदि राशियों में क्रम से धनेश की, लग्नेश की
और राहु की दशा में मृत्यु हो, अर्थात् जब शोर्षोदय राशि चर हो तो धनेश की,
स्थिर हो तो लग्नेश की द्विस्यभाव राशि हो तो राहु की दशा में मृत्यु होगी ।
यदि पृष्ठोदय राशि हो तो क्रम से चरादि राशि में उसके द्रेष्काणेश व उसके
देखने वाले ग्रह तथा उसमें युक्त की दशा में मृत्यु होगी ।
शीर्षोदय राशि ३, ५, ६, ७, ९, ११ |
पृष्ठोदय राशि २, ४, १, ९, १० का अन्त ।
३९--अल्पायु योग हो और अश्विनी नक्षत्र में उत्पन्न हुआ हो ( केतु दशा में )
तो उससे तीसरी दश सूर्य की होती है उसमें मरण होगा । इसी प्रकार जन्म नक्षत्र से