सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 266, कुल 454 में से
संदर्भ में पढ़ें२५६ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड
तीसरे नक्षत्र की दशा विशोत्तरी के अनुसार विचार लेना जैसे घनिष्ठा नक्षत्र में जन
हो तो तीसरा नक्षत्र पूर्वा भाद्रपद हुआ इसमें गुरु की दशा आती हैं ।
मध्यायु--लग्नेश के शत्रु की दशा में मृत्यु होगी मान लो लग्नेश बुध है तो उसके
शत्रु चन्द्र की दशा में मृत्यु होगी ।
दीर्घायु--अष्टमेश की दशा में मृत्यु हो। मान लो मिथुन लग्न है अष्टम में मकर
हुआ उसका स्वामी शनि अष्टमेश की दशा में मृत्यु होगी ।
४०--लग्न से अष्टम स्थान में लग्नेश, दशमेश व शनि इन तीनों में जो निवंल
हो उस ग्रह की दशा में मृत्यु हो ।
४१--मंगल की दशा--पंचमी में मृत्यु होती हैं या पाँचवीं दशा में ।
गुरु की दशा--षष्ठी में मृत्यु होती है या छठवीं दशा में ।
शनि की दशा--चतुर्थी में मत्यु होती है या चोथी दशा में ।
राहु की दशा--सप्तमी में मृत्यु होती है या सातवीं दशा में ।
जैसे किसी का जन्म भरणी नक्षत्र में हो तो शुक्र की विशोत्तरी दशा हुई इससे
छठवीं गुद की दशा आने पर मारक होगी (१ शुक्र, २ सयं, ३ चन्द्र, ४ मंगल ५
राहु, ६ गुरु की ) इस दशा में प्रयत्न से वचना । कोई जन्मदशा हो उससे यदि चौथी
शनि की पड़ जाय या राहु की सोतवों या मंगल की पांचवीं दशा पड़ जाय या छठवीं
गुरु की दशा पड़ जाय तव मारक होती है ।
४२--तीसरे छठें या आठवें के स्वामी की दशा कठिन होतो है जब उन पर पाप
ग्रह की दृष्टि हो तव मरण होता है । जब ये नीच में, अस्त, शत्रु गृही, ग्रह युद्ध में
पराजित हो और पाप ग्रह की भी दृष्टि हो तव और भी अधिक बुरे हैं । ३,६,८ घर
के स्वामी यदि क्रूर अंश में हों तो भी अपनी दशा में मरण करते हैं ।
४३--लग्नेश पाप युक्त और अस्त हो या नीच में या शत्रुगृह हो तो जव गोचर
में वही स्वामी दुष्ट स्थान ( ६,८,१२ ) में या लग्न में जावे या किसी प्रकार इनसे
सम्बन्धित हो तब मरण होता है ।
४४- लग्नेश छठे हो तो जिस राशि में बैठा हो उस राणि के समान वर्षों में
मृत्यु करता है । द्रेष्काण स्वामी छठे बंठा हो तो उतने महीनो में मृत्यु करता है ।नवांश
` स्वामी छठे बेठा हो तो उतने दिनों में मृत्यु करता है ।
४५--लग्नेश सूर्य से अस्त हो और अष्टमेश से दृष्ट हो तो जिस राशि में
लग्नेश बैठा हो उस राशि के समान बर्षो में रिष्ट करता है ।
४६--छग्तेश शत्रु राशि में हो तो राशि के अंक समान वर्षों में मृत्यु करता है। ४७- होरेश सूर्यं हो ओर सर्य से युक्त अष्टम में हो शुक्र की दृष्टि हो तो राशि
के समान वर्षो में मृत्यु करता हैं ।
४८--लग्नेश अष्टम हो उस पर सूर्य और शुक्र की दृष्टि हो तो राशि के समान वर्षों में मत्यु हो ।
४९--लग्नेश सप्तम स्थान में पाप ग्रह के युद्ध में पराजित हुआ हो तो जिस राशि