भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

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मारक स्थान : २५७

में हो उसे तिगुना करने से जो अंक आवे उतने महीने या वर्ष में मृत्यु हो ।

५०--राशि मेष वृष मिथुन ककं सिंह कन्या तुला वृश्चिक धन मकर कुम्भ मीन

अंश २० २५ २२ २२१२ १ ४ २३ १८ २० १४ १०वाँ

चन्द्र के अंश तुल्य भाग में जन्म होने से उतने वर्षो में मृत्यु होगी जेसे कन्या के

पहिले अंश में जन्म हो तो १ वर्षे में मृत्यु, वृष के २५ वें अंश में जन्म हो तो २५ वर्ष

में मृत्यु ( स० चि० ) ||

अस्य मत मेष वृष मिथुन कर्क सिंह कन्या तुला वृश्चिक धन मकर कुम्भ मीन

वर्षे ८ ९ २४ १२ १ ४ २ ३ २० २८ २१ १०

मेषादि चन्द्र से उतने वर्षों में मृत्यु होगी जैसे वृष के चन्द्र में ९ वर्ष में मिथुन के

चन्द्र में २४ वर्ष में इत्यादि ( ल० चं० ) ।

५१--अष्टमेश की दशा या अंतदंशा में मृत्यु होती है या ऐसे ग्रह की दशा या

अन्तदंशा में जो इससे युक्त या दृष्ट हो साधारणतः मृत्यु होती है । इसके अनुसार

पिता-माता भाई-बहन स्त्री-पुत्र आदि का मरण का योग भी जान सकते हो । जैसे--

यदि नवमेश की दशा हो उसमें अष्टमेश युक्त या दृष्ट हो तो-पिता की मृत्यु ।

यदि पंचमेश की दशा हो उसमें अष्टमेश युक्त या दृष्ट हो तो-संतान की मृत्यु । _

यदि चतुर्थेश की दशा हो उसमें अष्टमेश युक्त या दृष्ट हो तो-माता को मृत्यु ।

यदि तृतीयेश की दशा हो उसमें अष्टमेश युक्‍त या दृष्ट हो तो-भाई बहिन की

मृत्यु ।

यदि सप्तमेश की दशा हो उसमें अष्टमेश युक्त या दृष्ट हो तो-स्त्री की मृत्यु

इत्यादि ।

इसमें ग्रह का बल और उस काल का कारक का बल आदि विचार कर निर्णय

करना कि मृत्यु होगी या कोई भयानक घटना होगी आदि ( स० चि० ) ।

५२--लग्न सूर्य मौर मांदि के स्पष्ट अंक जोड़ने से प्राप्त राशि जो हो उसका

स्वामी जिस भाव में हो उस राशि में या उसके त्रिकोण में जब गुरु आये तब मृत्यु

होगी ( फल० ) ।

५३--माँदि से शनि के अंक घटाने से प्राप्त राशि हो और जो उसका नवांश

हो उस नवांश के त्रिकोण में जब शनि आवे तव मृत्यु होगी ( जा० पारि० )।

५४-जव धूम से गिनने पर ५ उपग्रहों के अंक जोड़ने से प्राप्त राशि से विशेष

द्रेष्काण में जब शनि आवे तव मृत्यु होगी ( जा० पारि० )।

५५--लग्न ओर मांदि के अंकों का जोड़ करने से जो राशि प्राप्त हो उसका

नवांश निकाळो तो सूर्य जब इस. विशेष राशि या विशेष नवांश में जावे उतने समय में

मृत्यु होगी ( फल० ) ।

५६--लग्न मांदि ओर चन्द्र के अंक जोड़ने से प्राप्ति राशि उदय राशि होगी उस

राशि में जब चन्द्र जायगा तब बीमारी होगी ( फल२ ) ।

५७-मांदि के अंक से नवांश, द्वादशांश ओर द्रेष्काण निकालो जब उस नवांश

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