सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 268, कुल 454 में से
संदर्भ में पढ़ें२५८ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड
में गुरु, द्वादशांश में शनि ओर द्रेष्काण के त्रिकोण में जो रांशि है उसमें सूर्य जावे तब
मृत्यु होगी ( फल० ) ।
५८-—मांदि और शनि के अंक में ९ का गुणा करो ओर गुणनफल को जोड़ो
उसकी राशि निकाल कर नवांश निकालो इसमें जब शनि जायगा तब मृत्यु होगी । (फ.)
५९--लग्नेश में से यम कंटक के अंक घटाना इसकी राशि का नवांश निकालो
जब उस राशि के नवांश में गुरु जांये तब मृत्यु होगी ( जा० भ० ) ( जा. पारि. ) ।
६०--षष्ठेश द्वादशेश और अष्टमेश के अंकों का योग कर राशि निकालो इस
राशि या इसके त्रिकोण में जब शनि जावे तब मृत्यु सम्भव है ( फल० ) ।
६१--उदय द्रेष्काण के स्वामी युक्त जो राशि है उस राशि या उसके त्रिकोण में
जब शनि जायगा तब मृत्यु सम्भव है ( फल० ) ।
६२--अष्टम घर के द्रेष्काण स्वामी के घर में या उसके त्रिकोण में जब शानि जावे तब मृत्यु सम्भव है ( फल० ) ।
६३--लग्न से और चन्द्र से गिनने पर अष्टम घर और २२ वाँ द्रेष्काण निकाल कर देखो ओर यह भी देखो कि चन्द्र या मांदि बलहीन नवांश में है क्या । जव इनमें से किसी घर के त्रिकोण में शनि आयगा तव मृत्यु सम्भव है ।
६४--अष्टमेश की राशि से लग्नेश के नवांश की राशि कितनी चली गई है अर्थात् दोनों का अन्तर क्या है निकालो उसमें शनि आयगा तब मृत्यु सम्भव है ।
६५--जन्म समय चन्द्र द्रेष्काण के पहिले भाग में या खर द्रेष्काण के स्वामी की राशि में ( खर द्रेष्काण-२२ वां द्रेष्काण ) या उसके त्रिकोण स्थित में या लग्न राशि या अष्टम घर या बारहवें घर में जब गोचर का चन्द्र जावे तब मृत्यु सम्भव है । ६६--अष्टमेश की राशि में, जिस नक्षत्र में सूर्यं हो वहाँ और अष्टमेश जिस नक्षत्र में हो, इन स्थानों में गोचर में जब सूयं और चन्द्र जावे तव मृत्यु होगी । ६७--गुलिक जहाँ है वह राशि या जिस राशि में पैदा हुआ हो उसके त्रिकोण की राशि। दिन में जन्म हो तो उससे सातवीं राशि में जब शनि जावे तब मृत्यु सम्भव है ( फल० )।
६८--गुरु और राहु के अंक जोड़ने से जो राशि प्राप्त हो उस राशि में यो उसके त्रिकोण में जब गुरु जावे तब मृत्यु संभव हैं । ६९-छग्न से अष्टम घर के द्रेष्काण के स्वामी जहाँ हों उस घर में शनि जावे तब मृत्यु संभव है ।
७०--उपरोक्त द्रेष्काण का स्वामी जिस घर में है उसका स्वामी जहाँ है उसकी राशि या नवांश में जब शनि आवे । ७१--जो शनि की राशि का अंक जन्म में हो उसमें शनि जावे या उसके त्रिकोण में जावे तब मृत्यु संभव है ।
Fr जहाँ हो उसकी राशि और अंश में शनि जावे तो भी उपरोक्त फल हैं।